सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साथ ही इस अवसर पर विश्वविद्यालय में एम.एड विशेष शिक्षा की संपर्क कक्षाओं का भी शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के एम.एड विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कर्मचारी, शिक्षकगण और अधिकारीगण सम्मिलित हुए विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा गया। जिसमे मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा स्कूलीय शिक्षा एवं विद्यार्थियों के हित में विभिन्न घोषणाएं की गई। इसके पश्चात विश्वविद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कार्यक्रम आरम्भ हुआ। जिसमे सभी गुरुओं ने अपने भावनात्मक विचार व्यत किये। कार्यक्रम में एम.एड विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां भी दी गईं।

गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर संबोधित करते हुए विशेष शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष हेमंत केसवाल ने कहा कि, यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि, आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर विश्वविद्यालय में एम.एड विशेष शिक्षा के प्रथम बैच की संपर्क कक्षाओं का शुभारम्भ हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि, हमें संयम, अनुशासन और प्रगतिशील विचार धारित करने चाहिए। डॉ. केसवाल ने कहा कि, ये संपर्क कक्षाएं इंटरेक्शन और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के माध्यम से विद्यार्थियों में विभिन्न प्रकार के कौशलों के विकास करने पर केंद्रित होगा।

यहां अकादमिक प्रशिक्षण के साथ-साथ एक उत्तम मानव का निर्माण करना भी हमारा उद्देश्य है। शिक्षक से गुरु तक की यात्रा करने की अभिलाषा हर शिक्षक की होती है। शिक्षक से गुरु बनने के लिए हमें अपने व्यक्तित्व का उच्चतम विकास करना होगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुद्रण एवं वितरण विभाग की निदेशक विभा मिश्रा ने कहा कि, गुरु की महिमा है कि, वह हमारा खुद से परिचय करता है। बचपन में माँ से लेकर बड़े होने तक हमारे जीवन के हर मोड़ पर हमें किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है और कई पथ प्रदर्शक मिलते हैं। वह सब हमारे गुरु समान ही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुशील मंडेरिया ने कहा कि, गुरु पर्व मनाने का उद्देश्य गुरु शिष्य परंपरा को पुनर्जीवित करना है। गुरु की भूमिका एक सफल व्यक्तित्व के निर्माण में बहुत अहम होती है। उन्होंने कहा कि, आज के समय में हम अपने छोटों से भी कई प्रकार के तकनीकी ज्ञान प्राप्त करते हैं। उनको भी हमें अपने गुरु के समान ही मनाना चाहिए। उन्होंने एम.एड के विद्यार्थियों से कहा कि, उन्हें यहां दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से भी गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करना चाहिए और अपने गुरुओं से लगातार संपर्क करते हुए ज्ञान प्राप्त करते रहना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन विद्यार्थी सहायता विभाग के निदेशक डॉ. रतन सूर्यवंशी द्वारा किया गया।
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