सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अपना करीबी दोस्त बताने वाला यह देश अब एक बड़े विवाद की वजह से सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस देश ने अमेरिका की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा भारतीय नागरिकों को अपने यहां से बाहर निकाला है। यह मामला न सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।
बताया जा रहा है कि वीजा नियमों के उल्लंघन, अवैध निवास और रोजगार से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए बड़ी संख्या में भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। दिलचस्प बात यह है कि वही देश सार्वजनिक रूप से भारत के साथ मजबूत दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी की बात करता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दोस्ती सिर्फ बयानों तक सीमित है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे देश जहां कड़े इमिग्रेशन कानूनों के लिए जाने जाते हैं, वहां से भी कम भारतीयों को निकाला गया, जबकि इस तथाकथित ‘मित्र देश’ से आंकड़े कहीं ज्यादा सामने आए हैं। इससे दोनों देशों के रिश्तों में असहजता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय समुदाय की ओर से भी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि वर्षों से वहां काम कर रहे भारतीयों को अचानक नियमों का हवाला देकर बाहर निकालना अमानवीय है। भारत सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है, ताकि भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा की जा सके।
यह मामला अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारत की विदेश नीति और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ गया है।