सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी व्यवस्थाओं में से एक खड़ी की है, जिसके दायरे में देश की बड़ी आबादी आती है। खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित कार्यक्रमों ने इस व्यवस्था को आकार दिया है। COVID-19 महामारी के दौरान Public Distribution System (PDS), MGNREGA और सामाजिक सुरक्षा हस्तांतरण जैसी योजनाओं ने कमजोर परिवारों को सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभाई।
भारत की कल्याणकारी संरचना की ताकत, कमियों और आगे की दिशा का आकलन करने के लिए Azim Premji University ने Realising Rights: A Handbook of Welfare in India जारी की है। Centre for the Study of the Indian Economy (CSIE) द्वारा तैयार इस हैंडबुक में 18 अध्यायों में 27 लेखकों का योगदान है। यह भारत की कल्याण नीतियों और सार्वजनिक प्रणालियों का अधिकार-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
हैंडबुक के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार, भारत के सामाजिक क्षेत्र के खर्च में राज्य सरकारों की हिस्सेदारी करीब 90% है, जबकि केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2008-09 में 23.6% से घटकर 2024-25 में 8.5% रह गई है।
सरकारें मिलकर इस खंड में शामिल कल्याण क्षेत्रों और योजनाओं पर GDP का लगभग 7% और कुल सार्वजनिक खर्च का 21% व्यय करती हैं। शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च GDP के करीब 4% और स्वास्थ्य पर 2% से कम बना हुआ है, जो दोनों ही नीतिगत लक्ष्यों से नीचे हैं।
हैंडबुक में कहा गया है कि अधिकार-आधारित हस्तक्षेपों ने कल्याणकारी कवरेज को काफी बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 6 लाख से बढ़कर 14 लाख हो गई। National Food Security Act के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न का दायरा 36.3 करोड़ लोगों से बढ़कर 81 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा। MGNREGA के तहत हर साल 200 – 300 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजित हुआ, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 55% से अधिक रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों का तेज विस्तार कल्याण वितरण के स्वरूप को बदल रहा है। साथ ही बढ़ती डिजिटलीकरण प्रक्रिया बहिष्करण और जवाबदेही से जुड़ी नई चुनौतियां भी पैदा कर रही है। मातृत्व लाभ, पोषण कार्यक्रम, पेंशन और स्वास्थ्य सेवा सहित कई प्रमुख योजनाओं में कवरेज, फंडिंग और क्रियान्वयन की खामियां अब भी बनी हुई हैं।
Azim Premji University की President Indu Prasad ने कहा, “भारत का संविधान हर नागरिक के लिए गरिमा, अवसर और न्याय की प्रतिबद्धता को समाहित करता है। हमें उम्मीद है कि यह हैंडबुक सूचित सार्वजनिक संवाद में योगदान देगी और अधिक समानतापूर्ण तथा समावेशी भारत के निर्माण के सामूहिक प्रयासों को मजबूत करेगी, ऐसे विकसित भारत की आकांक्षा को आगे बढ़ाते हुए जो किसी को पीछे न छोड़े।”
Centre for the Study of the Indian Economy, Azim Premji University की Dipa Sinha ने कहा, “यह हैंडबुक केंद्र सरकार के प्रमुख अधिकार-आधारित हस्तक्षेपों के विश्लेषण के जरिए भारत के कल्याण परिदृश्य की व्यापक तस्वीर पेश करती है। हमें उम्मीद है कि यह अकादमिक जगत, पत्रकारों, प्रैक्टिशनर्स और छात्रों के लिए उपयोगी संसाधन बनेगी और शोध को कार्रवाई में बदलने में मदद करेगी।”
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