सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पेसमेकर लगने के बाद मरीज को सामान्य जीवन में लौटने में कुछ समय लग सकता है। खासतौर पर शुरुआती हफ्तों में कुछ सावधानियां बरतना जरूरी होता है, क्योंकि इस दौरान पेसमेकर और उससे जुड़े तारों को शरीर में ठीक से स्थिर होने का समय चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। पेसमेकर लगने के बाद कुछ समय तक भारी सामान उठाने, जोर लगाने, धक्का देने और खींचने से बचना चाहिए। जिस तरफ पेसमेकर लगाया गया है, उस हाथ को शुरुआती कुछ हफ्तों में कंधे से ऊपर उठाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि हाथ को बिल्कुल स्थिर रखने के बजाय चिकित्सक द्वारा बताए गए हल्के व्यायाम करना जरूरी हो सकता है।
घाव की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखें। लालिमा, बढ़ती सूजन, ज्यादा दर्द, गर्माहट या घाव से पानी अथवा मवाद निकलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। नियमित जांच के लिए पेसमेकर क्लिनिक या हृदय रोग विशेषज्ञ के पास जाना भी जरूरी है। मरीज को अपने पेसमेकर का पहचान-पत्र हमेशा साथ रखना चाहिए और किसी भी डॉक्टर या दंत चिकित्सक को इलाज से पहले इसकी जानकारी देनी चाहिए। मोबाइल फोन को पेसमेकर के ऊपर शर्ट की जेब में रखने से बचें और मजबूत चुंबकीय उपकरणों को डिवाइस के पास न लाएं। चुंबकीय क्षेत्र से जुड़ी जांच या उपचार, जैसे एमआरआई, से पहले डॉक्टर को पेसमेकर की जानकारी देना जरूरी है। पेसमेकर लगने के बाद दवाओं को अपने आप बंद या बदलना भी सही नहीं है। वाहन चलाने, व्यायाम और काम पर लौटने का समय मरीज की स्थिति और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है। इसलिए अस्पताल से मिली व्यक्तिगत सलाह को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।
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