सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तर प्रदेश में आपराधिक मामलों की जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) से BNSS की धारा 180 के तहत दर्ज किए जाने वाले सभी गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा है। अदालत का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी तथा न्यायिक कार्यवाही के दौरान भी रिकॉर्डिंग उपयोगी साबित हो सकती है।
यह निर्देश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आगरा से जुड़े एक दहेज मामले में जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के समय जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि पहली शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करते समय उसका ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया था। कोर्ट के सवालों के बाद जांच अधिकारी ने बिना शर्त माफी भी मांगी।
अदालत ने बताया कि BNSS की धारा 180(3) और BNSS नियमावली, 2024 के नियम 20(1) के तहत जांच अधिकारी को गवाह के बयान को ऑडियो-वीडियो माध्यम से रिकॉर्ड करने की अनुमति है। वहीं, DGP के पहले के निर्देशों में दुष्कर्म पीड़िता के बयान की रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है, जबकि अन्य गवाहों के बयान के मामले में इसे वैकल्पिक रखा गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में इस विकल्प का इस्तेमाल रिकॉर्डिंग से बचने के लिए किया जा रहा है। अदालत ने DGP को सभी जांच अधिकारियों को संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी देने और उनके पालन के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश भी दिया है।
कोर्ट के अनुसार, जांच का उद्देश्य वास्तविक तथ्यों का पता लगाना और निर्दोष लोगों को गलत या त्रुटिपूर्ण जांच के कारण परेशान होने से बचाना होना चाहिए।
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