सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : गुजरात के अहमदाबाद में नवरात्रि के दौरान आयोजित एक गरबा कार्यक्रम में मुस्लिमों और अन्य धर्मों के लोगों को मैदान छोड़ने के लिए कहे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में गुजराती लोक गायक आदित्य गढ़वी प्रस्तुति दे रहे थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। इसके बाद ‘खलासी’ गाने से लोकप्रिय हुए गढ़वी ने इस घोषणा से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया कि यह उनका संदेश नहीं था। 14 अक्टूबर को हुआ था कार्यक्रम यह घटना अहमदाबाद के शेळा रोड स्थित सवाना पार्टी प्लॉट में 14 अक्टूबर को आयोजित ‘रंग मोरला’ गरबा कार्यक्रम की बताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान एक विराम के समय मंच से उद्घोषक और रेडियो जॉकी आकाश त्रिवेदी ने गैर-हिंदुओं और मुस्लिमों से मैदान छोड़ने की अपील की। घोषणा में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के स्वयंसेवकों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया। इस घोषणा का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को बाहर जाने के लिए कहने को लेकर सवाल उठने लगे। घटना ने गरबा जैसे सामूहिक सांस्कृतिक आयोजन में अलग-अलग समुदायों की भागीदारी और आयोजकों की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी।
आदित्य गढ़वी ने क्या कहा? विवाद बढ़ने के बाद आदित्य गढ़वी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि घोषणा न तो उनकी ओर से की गई थी और न ही यह उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मंच के पीछे के क्षेत्र पर नियंत्रण कर उनके मंच का इस्तेमाल ऐसी घोषणा के लिए किया, जिसका वह समर्थन नहीं करते। गढ़वी के अनुसार, उनकी टीम को इस बारे में पहले से जानकारी नहीं थी और वह इसमें शामिल भी नहीं थी।
गायक ने गरबा की समावेशी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गरबा ने कभी किसी से उसका उपनाम या धार्मिक पहचान नहीं पूछी। उन्होंने कहा कि गुजरात और देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग धर्मों के लोग पीढ़ियों से साथ गरबा करते आए हैं। उनके मुताबिक, मां के प्रति प्रेम और सम्मान के साथ आने वाले लोगों का स्वागत होना चाहिए।
वीएचपी की भूमिका पर भी चर्चा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीएचपी के एक प्रवक्ता ने गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी पर आपत्ति जताने वाले कार्यकर्ताओं की गतिविधियों का बचाव किया। इस रुख को लेकर भी चर्चा हुई। वहीं, अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने विवादित घोषणा का संज्ञान लेने और जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
गरबा की परंपरा और समावेशिता पर बहस नवरात्रि में गरबा देवी आराधना से जुड़ा पारंपरिक नृत्य है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। अहमदाबाद की इस घटना ने धार्मिक आस्था, आयोजन संबंधी नियमों और सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समावेशिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, आदित्य गढ़वी ने स्पष्ट कर दिया है कि मुस्लिमों और अन्य धर्मों के लोगों को बाहर जाने के लिए कहने वाली घोषणा उनके विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
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