सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अटल ने मुशर्रफ को आगरा बुलाया, आडवाणी ने कैसे बिगाड़ दी बात? दाऊद इब्राहिम का मुद्दा बना चर्चा की वजह
भारत और पाकिस्तान के बीच जुलाई 2001 में हुई आगरा शिखर वार्ता दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को बातचीत के लिए भारत आमंत्रित किया था। उम्मीद थी कि इस बैठक से कश्मीर और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर कोई सहमति बन सकती है, लेकिन वार्ता बिना संयुक्त घोषणा के समाप्त हो गई। अटल बिहारी वाजपेयी" और"लालकृष्ण आडवाणी"की भूमिका को लेकर बाद में कई राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाएं हुईं।
दाऊद इब्राहिम का मुद्दा क्यों उठा?आगरा शिखर वार्ता से पहले आडवाणी ने मुशर्रफ के साथ मुलाकात में भगोड़े अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम को भारत को सौंपने का मुद्दा उठाया था। आडवाणी के अनुसार, उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि की संभावना पर चर्चा करते हुए दाऊद को भारत भेजने का सुझाव दिया। मुशर्रफ ने जवाब में कहा था कि दाऊद पाकिस्तान में नहीं है। बाद में आडवाणी ने अपने संस्मरण में इस जवाब पर सवाल उठाए थे।
क्यों विफल हुई आगरा वार्ता?वार्ता के दौरान कश्मीर और सीमा पार आतंकवाद पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। भारत चाहता था कि आतंकवाद का मुद्दा समझौते में स्पष्ट रूप से शामिल हो, जबकि पाकिस्तान कश्मीर को केंद्रीय मुद्दा बनाने पर जोर दे रहा था। इन मतभेदों के चलते संयुक्त घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी और मुशर्रफ की यात्रा समाप्त हो गई।
आगरा वार्ता की विफलता को केवल एक व्यक्ति के फैसले से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसमें दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास, राजनीतिक प्राथमिकताओं और वार्ता की रणनीति ने अहम भूमिका निभाई।
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