सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में असफलताओं के बावजूद लगातार मेहनत करते रहने की प्रेरक कहानी परीक्षित मदान की है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में छह बार सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में चौथी रैंक हासिल की और अब हरियाणा सिविल सेवा (HCS) परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की परीक्षा में उन्होंने 364 अंक हासिल कर 27वीं रैंक प्राप्त की।
कॉरपोरेट क्षेत्र से सिविल सेवा तक का सफर हरियाणा के गुरुग्राम जिले के बादशाहपुर गांव के रहने वाले परीक्षित ने द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढ़ाई की। शुरुआत में उनका रुझान कॉरपोरेट क्षेत्र की ओर था, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि सिविल सेवा के माध्यम से लोगों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाने का अवसर मिल सकता है। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2017 में सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। इतिहास में रुचि होने के कारण उन्होंने इसे वैकल्पिक विषय चुना। आगे चलकर इतिहास में एमए किया और यूजीसी नेट-जेआरएफ भी क्वालिफाई किया।
छह असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार परीक्षित ने यूपीएससी की परीक्षा छह बार दी। इनमें से दो बार वे मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके। इस दौरान उन्होंने अन्य राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया। हर प्रयास से मिली सीख के आधार पर उन्होंने अपनी तैयारी और रणनीति में सुधार जारी रखा। इसका परिणाम BPSC में चौथी रैंक के रूप में सामने आया, जिसके बाद वे बिहार में एसडीएम बने।
अब हरियाणा में सेवा का अवसर HPSC में 27वीं रैंक हासिल करने के बाद परीक्षित के सामने बिहार में प्रशासनिक सेवा जारी रखने या अपने गृह राज्य हरियाणा लौटने का विकल्प है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल वे इस बारे में अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को यह संदेश देती है कि असफलताओं से सीखना, नियमित अभ्यास करना और अपनी रणनीति में सुधार करते रहना महत्वपूर्ण है।
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