भोपाल 1 अगस्त से प्रदेश में सभी ड्राइविंग लाइसेंस सेंट्रल सर्वर से बनाए जाने लगे हैं। इसके तहत आवेदक घर बैठे ही ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस भी प्राप्त कर पा रहे हैं। इसके बाद भी लाइसेंस बनने के दौरान प्रदेश की कंपनी पैसा कमा रही है। लाइसेंस बनाने के लिए फीस ट्रांसफर करने के लिए जिस पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल हो रहा है। उससे हर बार पैसे ट्रांसफर करने पर 71 रुपए शुल्क अलग से चुकाना पड़ता है। कहा जा रहा था कि सेंट्रल सर्वर से जुडऩे के बाद यह शुल्क नहीं चुकाना पड़ेगा, लेकिन आवेदकों पर अब भी यह बोझ डाला जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 2004 से स्मार्ट चिप कंपनी कम्प्यूटराइजेशन का काम करते हुए सभी ऑनलाइन काम संभाल रही है। 2017 से परिवहन विभाग ने सभी फीस भी ऑनलाइन लेना शुरू कर दिया है। इसके बाद आवेदकों को लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, ट्रांसफर, एनओसी जैसे सभी कामों के लिए ऑनलाइन ही फीस चुकानी पड़ती है। ऑनलाइन मनी ट्रांसफर के लिए जिस पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल किया जाता है, उसके लिए हर बार कंपनी 71 रुपए अलग से चार्ज करती है। जब केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सेंट्रल सर्वर से जोडऩे और उसी पर काम करने के निर्देश दिए तो माना जा रहा था कि अब आवेदकों को इस शुल्क से मुक्ति मिलेगी, लेकिन 1 अगस्त से लाइसेंस का काम सारथी नाम के सेंट्रल सर्वर पर शिफ्ट होने के बाद भी आवेदकों को इस शुल्क से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
फीस के साथ 71 रुपए देना पड़ रहे हैं अतिरिक्त
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पहले आवेदक को लर्निंग और बाद में परमानेंट लाइसेंस बनवाना पड़ता है। दोनों ही बार फीस के साथ यह 71 रुपए अतिरिक्त देना पड़ते हैं। इस तरह हर बार 142 रुपए ज्यादा चुकाने पड़ते हैं। लर्निंग लाइसेंस की फीस जहां 400 रुपए है, वहीं ऑनलाइन ट्रांसफर के कारण आवेदक को 471 रुपए और पक्के लाइसेंस की फीस 1100 रुपए होने पर भी 1171 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।
आवेदकों और एजेंटों ने की शिकायत
इस मामले में परिवहन विभाग को आवेदकों और एजेंटों द्वारा शिकायत की जा रही है। एजेंट हर्ष जोशी और सोनू अग्रवाल ने बताया कि सारे काम सेंट्रल सर्वर पर होने के बाद भी यह फीस ली जाना अवैध वसूली है। पहले से फीस बढ़ाए जाने से आवेदक परेशान थे। उम्मीद थी कि हर काम के लिए अब 70 रुपए कम लगेंगे, लेकिन वसूली जारी है।