सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल पुराने एसिड अटैक मामले में लंबित न्यायिक प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे “देश के लिए शर्म की बात” बताया है। अदालत ने केंद्र सरकार को विस्तृत निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब न केवल पीड़ितों के अधिकारों का हनन है, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शीर्ष अदालत ने सरकार से पूछा कि आखिर एसिड अटैक पीड़ितों के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कठोर सजा दिलाने के लिए क्या व्यवस्थित उपाय किए गए हैं।

इस सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि देश में कई एसिड हमले के मामले वर्षों तक लंबित पड़े रहते हैं, जिससे पीड़ितों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह एसिड प्रतिबंध, पीड़ित पुनर्वास, मुआवजा वितरण और कानूनी सहायता से जुड़े नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एसिड की बिक्री पर कड़ा नियंत्रण लागू करें और दोषियों को कठोर दंड देने हेतु विशेष तंत्र स्थापित करें। अदालत ने यह भी कहा कि एसिड अटैक पीड़िता के पुनर्वास, चिकित्सा सहायता और समाज में सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए सरकारों की जिम्मेदारी स्पष्ट और बाध्यकारी होनी चाहिए।

इस मामले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि एसिड हमले केवल अपराध नहीं, बल्कि अमानवीय हिंसा का रूप हैं, जिनके खिलाफ न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई अत्यावश्यक है।

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