सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का 58वाँ प्रांत अधिवेशन डबरा स्थित जलसा गार्डन में आयोजित हुआ। अधिवेशन के अवसर पर अस्थाई रूप से नगर का नाम ‘गुरु तेगबहादुर नगर’ रखा गया तथा मुख्य सभागार का नाम प्रो. यशवन्त राव केलकर जी के नाम पर रखा गया। अंतिम दिन प्रांत की नवीन कार्यकारणी की घोषणा हुए जिसमें प्रांत अध्यक्ष प्रो धर्मेंद्र राजपूत जी ,प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी, प्रांत सह मंत्री सत्यादित तोमर,उमा वैष्णव, कविता खटीक, हिमांशु शर्मा, दिव्यांश बक्शी बने ।
अधिवेशन में मध्यप्रदेश के 22 जिलों से 492 प्रतिनिधि, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षाविद एवं पूर्णकालिक कार्यकर्ता शामिल थे, भाग लेकर विभिन्न शैक्षिक, सामाजिक, पर्यावरण एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा और प्रस्ताव पारित किए।
अधिवेशन का उद्घाटन
अधिवेशन का उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। विशेष अतिथि के रूप में अभाविप के मध्य क्षेत्र संगठन मंत्री चेतस सुखड़िया, प्रांत अध्यक्ष प्रा. धर्मेंद्र राजपूत और प्रांत मंत्री श्री केतन चतुर्वेदी उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने कहा कि अभाविप केवल विचारधारा नहीं बल्कि समय का शिल्पकार है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल कक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण में भी योगदान करते हैं। भारत का युवा जॉब क्रिएटर है और नारी शक्ति राष्ट्र का अभिभूत शक्ति है। उन्होंने तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई – युवा शक्ति, नारी शक्ति और सद्भावना से पूर्ण भारत।


विशेष अतिथि चेतस सुखड़िया ने अधिवेशन को विचारधारा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अभाविप ने 77 वर्षों में राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और समाज सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवेशन के दौरान विभिन्न सामाजिक, राष्ट्रीय एवं शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
प्रदर्शनी
अधिवेशन के अवसर पर भव्य प्रदर्शनी ‘भगवान दास माहौर प्रदर्शनी’ का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. सुनील सचदेवा और विशिष्ट अतिथि अमरदीप औलख तथा प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश तोमर की उपस्थिति में हुआ। प्रदर्शनी में अभाविप के संगठनात्मक कार्यक्रम, भगवान बिरसा मुंडा, रानी अबक्का, भारतीय संविधान, भारतीय लोकतंत्र और महापुरुषों के योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।
भाषण सत्र एवं शोभायात्रा
अधिवेशन के दूसरे दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने भाषण सत्र में कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली व्यक्ति, समाज और प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित करती है। उन्होंने छात्र जीवन को सार्थक और मीनिंगफुल बनाने का संदेश दिया।
इस दिन अभाविप के छात्र-छात्राओं द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो जलसा गार्डन से शुरू होकर बल्ला का डेरा, परशुराम चौराहा, मैथिलीशरण गुप्त चौराहा एवं अग्रसेन चौराहा होते हुए सराफा बाजार तक गई। शोभायात्रा में छात्राएं पारंपरिक पगड़ी, हाथों में तख्तियां और अभाविप ध्वज लेकर शामिल हुईं। शहर के समाजजन एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा पुष्प वर्षा और आतिशबाजी के माध्यम से स्वागत किया गया। खुले मंच पर छात्र नेताओं ने शिक्षा, सामाजिक समरसता, नारी शक्ति, बढ़ते लव जिहाद, जनजातीय गौरव और विकसित भारत जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
अंतिम भाषण सत्र
अधिवेशन के अंतिम दिन राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि अभाविप का कार्य वर्तमान, अतीत और भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि अभाविप ने छात्र समुदाय को हमेशा संगठन, दिशा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया है।


आशीष चौहान जी ने कहा कि अभाविप की प्रासंगिकता वर्तमान, अतीत और भविष्य से जुड़ी हुई है। अभाविप ने केवल सदस्यता नहीं ली, बल्कि कैंपस में निरंतर कार्य किया है। यह प्रांत अधिवेशन पहली बार किसी जिले की तहसील में आयोजित हुआ है। अभाविप प्रासंगिक थी, है और हमेशा रहेगी। यह राष्ट्र अपना है और इसे परम वैभव तक ले जाने के विचार के साथ अभाविप की 1949 में स्थापना हुई। अभाविप अपनी 77 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुकी है।
भारत 4.1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी साइज वाला देश है। भारत बहुत बड़ी शक्ति है, परंतु हमें इसे प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से आगे बढ़ाना है।
सबसे ऊपर आने के लिए बहुत परिवर्तन करना पड़ेगा। भारत हर देश के साथ संतुलन बना कर चलता है। असम, दिल्ली, गुवाहाटी, बेंगलूर, हैदराबाद, पंजाब आदि हर जगह अभाविप सक्रिय है। पंजाब छात्र संघ में 40 साल बाद अध्यक्ष पद अभाविप ने जीता।
नेपाल में जब जेन ज़ेड का नरेटिव फैला कि भारत का युवा भी ऐसा करेगा, तब तक अभाविप और राष्ट्र विचार के लोग इसे रोकते हैं वीआईटी विश्वविद्यालय में छात्रों की आगजनी के समय अभाविप कार्यकर्ताओं ने समझाया। आरजीपीवी के एनएएसी ए++मुद्दों पर लगातार कार्य कर रही है। अभाविप प्रवेश, परीक्षा और परिणाम के मामलों में निरंतर कार्य करती रही है। अभाविप छात्र आंदोलन के रूप में भी प्रासंगिक है। देश को आगे ले जाने के लिए सबसे पहले समरसता का आग्रह करना होगा। अभाविप प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करती है। अभाविप ने पूर्व में घुसपैठ के विरोध में चिकन नेक आंदोलन किया और कश्मीर में धारा 370 के खिलाफ आंदोलन किया।
छात्रों के स्क्रीन टाइम की वजह से अटेंशन टाइम कम हो रहा है। अभाविप में पद नहीं, दायित्व दिए जाते हैं। इसके चार स्तंभ हैं: विद्यार्थी, प्राध्यापक, पूर्णकालिक और पूर्व कार्यकर्ता। जिस प्रकार टेबल के चारों पर जरूरी होते हैं, वैसे ही यह अभाविप में जरूरी हैं।”
प्रमुख तथ्य एवं आकर्षण
अधिवेशन में कुल 10 सत्र आयोजित हुए, जिसमें 2 भाषण सत्र विशेष थे।
भव्य प्रदर्शनी एवं खुले मंच कार्यक्रम।
जीरो फूड वेस्ट का पालन किया गया।
शोभायात्रा में समाजजन ने पुष्प वर्षा एवं अभिनंदन किया।
प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि यह 58वां प्रांत अधिवेशन डबरा में ऐतिहासिक और भव्य रूप से संपन्न हुआ। अधिवेशन में पारित प्रस्ताव शिक्षा, समाज, पर्यावरण, सुरक्षा और राष्ट्रीय चेतना को दिशा देने में मार्गदर्शक होंगे।
अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान, क्षेत्रीय संगठन मंत्री चेतस सुखड़िया, प्रांत अध्यक्ष प्रा. धर्मेंद्र राजपूत एवं प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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