सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : हर साल लाखों भारतीय किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करने के लिए भारत की नागरिकता छोड़ रहे हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर आंकड़े पेश किए, जिससे स्पष्ट होता है कि पिछले छह वर्षों में यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है।
विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन ने बताया कि साल 2024 में 2,00,543 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी, जो कि 2023 के 2,25,620 की तुलना में थोड़ी कम है। हालांकि यह संख्या अब भी चिंताजनक बनी हुई है। सबसे कम नागरिकता छोड़ने का आंकड़ा कोविड काल यानी 2020 में रहा, जब केवल 85,242 लोगों ने ऐसा किया था। इसके बाद यह संख्या हर वर्ष तेजी से बढ़ी है।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक:
2020: 85,242
2021: 1,63,370
2022: 2,25,620 (अब तक सबसे अधिक)
2023: 2,25,620
2024: 2,00,543
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ये आंकड़े उन भारतीयों के हैं जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर जीवनशैली, उच्च शिक्षा, और पेशेवर अवसरों के चलते नागरिक विदेशों में बसने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि “ब्रेन ड्रेन” यानी प्रतिभाओं का पलायन भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह देश में अधिक अवसर और अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयास कर रही है ताकि नागरिक विदेश जाकर बसने को मजबूर न हों।
#भारतीय_नागरिकता #नागरिकता_त्याग #सरकारी_आंकड़े #विदेश_प्रव्रजन #भारतीय_प्रवासी