विदेश मंत्रालय 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित करता है। संबंधित देशों में भारतीय दूतावास हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी करते हैं, ताकि फंसे नागरिक अपना पंजीकरण करा सकें। परिवारों को भी नियमित अपडेट दिए जाते हैं।
भारतीयों को एडवाइजरी जारी कर सुरक्षित स्थानों पर रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और दूतावास से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी जाती है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से नागरिकों की लोकेशन और संख्या का आकलन किया जाता है।
स्थिति के अनुसार एयर इंडिया या चार्टर्ड विमानों से विशेष उड़ानें संचालित की जाती हैं। यदि हवाई क्षेत्र बंद हो, तो पड़ोसी सुरक्षित देशों के रास्ते निकासी की व्यवस्था की जाती है। जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना के विमान भी तैनात किए जा सकते हैं
समुद्री मार्ग उपलब्ध होने पर भारतीय नौसेना के जहाजों की मदद ली जाती है। अतीत में ऐसे कई अभियानों में नौसेना ने हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकाला है।
भारत संबंधित देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर सुरक्षित कॉरिडोर सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
सरकार का लक्ष्य यह होता है कि हर भारतीय नागरिक को सुरक्षित, शीघ्र और व्यवस्थित तरीके से स्वदेश लाया जाए। नागरिकों से अपील की जाती है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें और दूतावास के निर्देशों का पालन करें।