सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पर बाहरी निवासी सवाल नहीं उठा सकते। यह याचिका इंग्लैंड निवासी ने दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि 2023 से पहले बनी गाड़ियां इथेनॉल मिक्स पेट्रोल के अनुकूल नहीं हैं और इससे माइलेज भी कम हो रहा है।
सरकार ने अदालत में दलील दी कि 2025-26 तक देश के सभी पेट्रोल पंपों पर E20 (20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल) उपलब्ध कराया जाएगा। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि भारत में कौन सा ईंधन इस्तेमाल होगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि E20 से गाड़ियों को कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। 1 लाख किलोमीटर तक के परीक्षण में इंजन की पावर, टॉर्क और माइलेज पर कोई गंभीर असर नहीं पाया गया। हालांकि पुरानी गाड़ियों में 3-6% तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन यह सामान्य मेंटेनेंस और इंजन ट्यूनिंग से सुधारा जा सकता है।
एथेनॉल के कई फायदे हैं। यह प्रदूषण को कम करता है, क्योंकि इसमें मौजूद 35% ऑक्सीजन नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन घटाती है। किसानों को भी सीधा लाभ होगा क्योंकि गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से एथेनॉल का उत्पादन किया जाता है। 2023 से अब तक किसानों को इससे 21 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई है।
सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से न सिर्फ प्रदूषण घटेगा बल्कि देश की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी और ईंधन के दाम स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
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