सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जाड़े की गुलाबी दस्तक के साथ भोपाल की वादियाँ एक बार फिर टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य व कला महोत्सव—विश्व रंग के रंगों से सराबोर होने जा रही हैं। रवीन्द्र भवन के विस्तृत परिसर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव अपने सातवें संस्करण में प्रवेश कर रहा है। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, विश्वरंग फाउंडेशन और देश-विदेश की 50 से अधिक संस्थाओं की साझेदारी से यह आयोजन एशिया का सबसे बड़ा अशासकीय सांस्कृतिक कुंभ बन चुका है।
विश्व रंग के महानिदेशक संतोष चौबे ने बताया कि 2019 में शुरू हुई यह यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होकर सामने आई है। मॉरिशस, श्रीलंका, दिल्ली और मुंबई से होता हुआ महोत्सव पुनः भोपाल लौटा है। उद्घाटन 27 नवंबर की शाम राज्यपाल मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में होगा जिसमें मॉरिशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन एवं अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
इस बार विश्व रंग में 35 से अधिक देशों के 60 प्रतिनिधि, 1000 से अधिक साहित्यकार, कला–संस्कृति विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, मीडिया हस्तियाँ और युवा प्रतिभाएँ भाग लेंगी। महोत्सव में 80 से अधिक सत्र विचार-विमर्श, संवाद, कला, संगीत, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सराबोर होंगे।
मुख्य आकर्षणों में नई दिल्ली के श्रीराम कला केन्द्र द्वारा श्रीकृष्ण लीला, नागपुर रंग समूह द्वारा अहिल्या रूपेण संस्थिता महानाट्य, ध्रुपद, लोकसंगीत, ‘देश राग’, ‘सतवाणी’, और बंगाल के बांग्ला संगीत की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। जनजातीय प्रकोष्ठ ‘आदिरंग’ में हेरिटेज फ़िल्मों ‘गणगौर गाथा’ और ‘संजा’ का प्रदर्शन, जनजातीय कला दीर्घा और कठपुतली आधारित जनसंचार प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित करेगी।
महोत्सव में विश्व रंग मानद अलंकरण के तहत छह भाषाओं के प्रख्यात साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, दस्तावेज़ी साहित्य के महत्वपूर्ण लोकार्पण तथा 50 से अधिक देशों में हिंदी की रचनात्मकता पर आधारित रिपोर्ट ‘विश्व में हिंदी’ भी प्रस्तुत होगी।
समापन समारोह 29 नवंबर को होगा, जिसमें विश्व हिन्दी ओलंपियाड के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
पंजीकरण हेतु लिंक: https://vishwarang.com/bhopal-2025/
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