सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : विश्वरंग 2025 टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के दूसरे दिन का आयोजन अत्यंत भव्य और विचारोत्तेजक रहा। महोत्सव का उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रवीन्द्र भवन में किया। मंच पर विश्वरंग के महानिदेशक संतोष चौबे, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधापति, विश्वरंग निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, और सीवीआरयू खंडवा के कुलपति डॉ. अरूण रमेश जोशी उपस्थित रहे। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं और साहित्य का उद्देश्य आनंद और राग की भावना फैलाना है। उन्होंने हिन्दी भाषा की वैश्विक पहचान और भारतीय संस्कृति की जियो और जीने दो की पवित्र भावना पर जोर दिया।

द्वितीय दिवस का मंगलाचरण द्रुपद संस्थान के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राग भोपाली, कलिंद, यमन और केदार से हुआ, जिससे सभागार में सुर और भव्यता का अनुभव हुआ। इसके बाद साहित्य, कला और एआई के युग में मानव चेतना पर सत्र आयोजित हुआ। इसमें नंदकिशोर आचार्य और संतोष चौबे ने भाषाई और सांस्कृतिक संकट, जेनरेटिव एआई के प्रभाव और मानवीय चेतना की सुरक्षा पर गहन चर्चा की।
नए कौशल सत्र में मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू ने अपने जीवन अनुभव साझा किए, संघर्ष और अनुभव के माध्यम से सीखने का संदेश दिया। क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने हिंदी कॉमेंट्री के महत्व और लेखन के जरिए खेल के इतिहास और भावनाओं को समझाने की आवश्यकता पर चर्चा की। गीतकार स्वानंद किरकिरे ने संगीत और शब्दों के माध्यम से जीवन की सहजता और प्रेरणा पर बात की।

समानांतर सत्रों में अशोक भौमिक ने युद्ध और युद्ध-विरोधी चित्रकला की भूमिका पर व्याख्यान दिया। कविता सत्र में कुमार अनुपम, डॉ. वीणा सिंह और लीलाधर मंडलोई ने साहित्यिक गहराई और सामाजिक सरोकारों पर चर्चा की। प्रवासी साहित्य पर रामा तक्षक, डॉ. पूर्णिमा वर्मन और कुमार सुरेश ने प्रवासी जीवन और स्मृतियों के माध्यम से कथेतर साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। फूड सत्र ‘चटखारों की चौपाल’ में प्रो. पुष्पेश पंत ने व्यंजनों और भोजन संस्कृति पर रोचक चर्चा की।
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