सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, रायसेन द्वारा विश्व रंग फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित “विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी शोधार्थी सम्मेलन” का समापन अत्यंत गरिमामय और सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में भारत सहित ओमान, कतर, अर्मेनिया, अमेरिका, अफगानिस्तान और चीन के शोधार्थियों, विद्वानों और हिंदी प्रेमियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक शोध भाषा के रूप में स्थापित करना और नई पीढ़ी को मौलिक शोध के लिए प्रेरित करना रहा।मुख्य अतिथि करुणाशंकर उपाध्याय (मुंबई विश्वविद्यालय) ने कहा कि हिंदी अब केवल साहित्य नहीं बल्कि वैश्विक बौद्धिक विमर्श की भाषा बन रही है। कुलाधिपति संतोष चौबे ने भारतीय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने और सांस्कृतिक शोध को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीय चेतना की वाहक है और इसे शोध का केंद्र बनाना चाहिए।

ब्रिटेन से डॉ. वंदना मुकेश ने शोध को जीवन का हिस्सा बताया जबकि अमेरिका से सुश्री कुसुम ने कहा कि विदेशों में लोग अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए हिंदी सीख रहे हैं। अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी के वैश्विक विकास, आदिवासी भाषाओं के संरक्षण और मातृभाषा की भूमिका पर विचार साझा किए।
सम्मेलन के अंत में विजेता शोधार्थियों को प्रमाणपत्र और नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर सभी वक्ताओं ने शोध की गुणवत्ता, विचारों की गहराई और सांस्कृतिक चेतना की सराहना की। यह आयोजन हिंदी को केवल भाषा नहीं, बल्कि एक वैश्विक चेतना के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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