सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / उज्जैन : पुस्तकें केवल सूचनाओं का भंडार नहीं, बल्कि अनुभव और भावनाओं की संवाहक भी हैं। कुलगुरु ने घोषणा की कि शीघ्र ही विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में अत्याधुनिक ई-पुस्तकालय सुविधा शुरू होगी, जिससे विद्यार्थी घर बैठे चौबीसों घंटे देश-विदेश में उपलब्ध ई-पुस्तकों एवं शोध-पत्रों तक पहुंच बना सकेंगे। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला तथा महाराजा जीवाजीराव पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में अशोक त्रिवेदी सभागृह में प्रख्यात ग्रंथालय विज्ञान विद्वान शियाली रामामृत रंगनाथन की जयंती एवं पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस समारोह के अवसर पर ज्ञान, पुस्तकालय एवं पाठन संस्कृति पर केंद्रित समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन में उपरोक्त उद्गार व्यक्त किए तथा श्रोताओं को पुस्तक प्रेम की ओर पुनः आकर्षित किया।

मुख्य अतिथि के रूप में विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बालकृष्ण शर्मा उपस्थित रहे। समारोह में वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में विषय प्रवक्ता आचार्य जे.एम. गौतम जीवाजी राव विश्वविद्यालय, ग्वालियर के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहें। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत महाराज जीवाजीराव पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष अनिल कुमार जैन द्वारा किया गया। पुस्तकालयाध्यक्ष जैन द्वारा स्वागत भाषण में कहा कि कुलगुरु अर्पण भारद्वाज के नेतृत्व में विश्वविद्यालय विकास की ओर निरंतर अग्रसर है। अध्ययनशाला की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभागाध्यक्ष राज बोरिया के नेतृत्व में पुस्तकालय विज्ञान विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में पीएचडी में 35 विद्यार्थी पंजीकृत हैं और पिछले तीन वर्षों में 22 विद्यार्थियों ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस वर्ष भी 5-6 विद्यार्थियों ने नेट में सफलता अर्जित की है। साथ ही, विभाग में विद्यार्थियों की संख्या एवं संसाधनों में लगातार वृद्धि हो रही है। डॉ. जे.एम. गौतम पुस्तकालय विज्ञान विभागाध्यक्ष, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर ने वर्चुअल माध्यम से डॉ. रंगनाथन के जीवन एवं कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान को नई दिशा देने वाले ‘पांच सूत्र’ प्रतिपादित किए, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के युग में भी पुस्तकालय का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि ई-पुस्तकालय जैसी नई सुविधाओं ने ज्ञान तक पहुंच को और आसान बना दिया है।
विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बालकृष्ण शर्मा ने अपने मुख्य अतिथि भाषण में ‘पुस्तक’ और ‘ग्रंथ’ के भारतीय संदर्भ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की श्रुति परंपरा से लेकर ताड़पत्र, भोजपत्र, कागज और आज के डिजिटल युग तक पुस्तक का स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन उसका महत्व सदैव अमूल्य रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पुस्तकों का सम्मान करें, क्योंकि जो व्यक्ति पुस्तक के आगे झुकता है, उसे जीवन में किसी और के आगे झुकना नहीं पड़ता। साथ ही कहा कि आज पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के साथ अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस भी हैं। पुस्तक परम आदरणीय ग्रंथ है पुस्तक के प्रति हमेशा हमारे मन में आदर की भावना की कमी नहीं होनी चाहिए तभी हम पुस्तकालयों की रक्षा कर पाएंगे।
विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल संसाधनों के विस्तार के बावजूद मुद्रित पुस्तकें पाठकों के साथ जीवंत संवाद स्थापित करती हैं। उन्होंने कवि शफ़दर हाशमी की कविता ‘किताबें करती हैं बातें’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पुस्तकें केवल सूचनाओं का भंडार नहीं, बल्कि अनुभव और भावनाओं की संवाहक भी हैं। उन्होंने घोषणा की कि शीघ्र ही विक्रम विश्वविद्यालय में ऐसी ई-पुस्तकालय सुविधा शुरू होगी, जिससे विद्यार्थी घर बैठे चौबीसों घंटे देश-विदेश में उपलब्ध ई-पुस्तकों एवं शोध-पत्रों तक पहुंच बना सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान विभाग से हाल ही में जेआरएफ के लिए चयनित विद्यार्थियों अनिल कुमार, कविता गौर, राधेश्याम परमार, वंदना एवं सुभाष वात्सल्य का माल्यार्पण कर स्वागत सम्मान किया गया।
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष राज बोरिया ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया और आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकालय और पठन संस्कृति से निरंतर जोड़े रखेंगे। कार्यक्रम के समापन के पश्चात कुलगुरु अर्पण भारद्वाज और एनसीसी के कैडेट्स द्वारा पौधारोपण किया गया।कार्यक्रम का संचालन विशाल जाधव और आभार विभागाध्यक्ष राज बोरिया द्वारा किया गया।
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