सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के विधि शिक्षण एवं शोध विभाग द्वारा 76वें संविधान दिवस के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक जागरूकता, आलोचनात्मक चिंतन, तथा सार्थक शैक्षिक संवाद को प्रोत्साहन देना था।


प्रश्नोत्तरी एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता
कार्यक्रम के प्रथम दिन विभाग द्वारा प्रश्नोत्तरी एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 31 टीमों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वाद-विवाद प्रतियोगिता हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की गई, जिसमें भोपाल के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों ने भाग लिया।
वाद-विवाद के प्रमुख विषय –
समान नागरिक संहिता
डिजिटल गोपनीयता एवं डेटा संरक्षण
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025
‘एक राष्ट्र—एक चुनाव’
कानून निर्माण में राज्यपालों की भूमिका
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
प्रश्नोत्तरी एक लिखित प्रारंभिक दौर से प्रारंभ हुई, जिसके बाद सेमीफाइनल एवं फाइनल दौर आयोजित किए गए।
प्रतियोगिता के परिणाम निम्नानुसार रहे—
विजेता –
आदित्य मिश्रा, सुधांशु अग्रवाल एवं गौरव मेवाड़ा
(बरकतउल्ला विश्वविद्यालय)
उपविजेता –
शिवानी धाकड़, मो. इरफान, योगेश कुमार सोनी
(कैरीयर कॉलेज ऑफ लॉ)
प्रतियोगिता में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
संविधान दिवस समारोह
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस संविधान दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य आतिथ्य राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने ग्रहण किया।
उन्होंने अपने संबोधन में संविधान निर्माण से अब तक हुए परिवर्तनों पर शोध की आवश्यकता पर बल दिया तथा विद्यार्थियों को संवैधानिक अध्ययन में गहनता लाने का संदेश दिया। इस अवसर पर बोलते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के
कुलगुरु एसके जैन ने कहा कि समाज एवं राष्ट्रहित सदैव व्यक्तिगत हितों से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दिया।
विभागाध्यक्ष मोना पुरोहित ने सभी को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने संविधान के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों एवं आदर्शों को जीवन में आत्मसात करें तथा अपने कर्तव्यों का मनोयोगपूर्वक निर्वहन करें।
इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह और संवैधानिक भावना से ओतप्रोत हो उठा।
दो दिवसीय यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इससे न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि हुई, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मुद्दों पर तर्कपूर्ण, तथ्यात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
विधि शिक्षण एवं शोध विभाग का यह प्रयास संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा युवा पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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