सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वनमाली कथा सम्मान समारोह का कार्यक्रम अत्यंत समृद्ध और साहित्यिक दृष्टि से गहन रहा। समारोह की शुरुआत प्रथम सत्र से हुई, जिसमें सम्मानित रचनाकारों का रचना पाठ आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता ज्ञानपीठ सम्मानित वरिष्ठ रचनाकार प्रतिभा राय ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र प्रसाद मिश्र और संतोष चौबे ने अपनी उपस्थिति से सत्र को विशेष बनाया। मृदुता गर्ग और अलका सरावगी ने अपने नवीन उपन्यासों के अंशों का संवेदनशील और प्रभावशाली पाठ प्रस्तुत किया। उल्लेखनीय है कि उड़िया की चर्चित कहानी का हिंदी अनुवाद भी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा किया गया, जिसे उन्होंने वरिष्ठ रचनाकारों के समक्ष प्रस्तुत किया। संतोष चौबे ने पाठ की विशेषताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अच्छा पाठ वही होता है जो पाठक को स्तब्ध कर दे और आजकल की कहानियों में अकेलापन सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। प्रतिभा राय ने साहित्य में संवेदनाओं और ह्यूमनिज़्म के महत्व पर प्रकाश डाला तथा लेखक को निर्भय और संवेदनाओं से ओतप्रोत होने की आवश्यकता बताई।
दूसरे सत्र में लेखक अंजुम शर्मा ने डिजिटल युग में साहित्य – पाठक परिवर्तन और नई प्रासंगिकताएं विषय पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस सत्र में संतोष चौबे और लीलाधर मंडलोई ने विशेष सान्निध्य दिया। अंजुम शर्मा ने साक्षात्कार और संवाद के दौरान रचनाकार के व्यक्तित्व और संवेदनाओं को समझने के महत्व पर जोर दिया तथा बताया कि साहित्य की स्थायी संवेदनाएँ डिजिटल माध्यमों में भी अपरिवर्तित रहती हैं।
तीसरे सत्र में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा रंग-संगीत की प्रस्तुति दी गई, जिसमें विभिन्न नाटकीय गीतों और कविताओं के माध्यम से सामाजिक, मानवीय और प्रकृति संवेदनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। अंत में रंगशीर्ष नाट्य समूह, भोपाल ने संतोष चौबे की कहानी मगर शेक्सपियर को याद रखना का नाट्य मंचन कर समारोह का समापन किया। यह प्रस्तुति मानवीय द्वंद्व, कला की सृजनात्मकता और व्यक्तिगत संघर्षों को गहराई से दर्शाती हुई संवेदनात्मक छाप छोड़ गई।
सत्र का संचालन संगीता पाठक ने किया, आभार रुचि मिश्रा तिवारी ने व्यक्त किया, और प्रतीक चिन्ह एवं पुस्तकें ज्योति रघुवंशी द्वारा वितरित की
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