जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने नियम-139 के अधीन अविलंबनीय लोक महत्व के विषय “प्रदेश में लगातार कम होते भू-जल स्तर एवं परम्परागत जल संग्रहण संरचनाओं के सतत् समाप्त होने से उत्पन्न स्थिति” पर चर्चा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि जल है तो कल है, जल है तो भविष्य है तथा जल विकास और प्रगति की बुनियाद है।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में गत दिनों जल गंगा संवर्धन अभियान जन-आंदोलन के रूप में चलाया गया। इसके तहत व्यापक पैमाने पर जल संरचनाओं के गहरीकरण, सौंदर्यीकरण एवं विकास का कार्य किया गया। नदी-नाले, कुएँ, तालाब, बावड़ी आदि जल-स्रोतों को पुनर्जीवित किया गया। गत वर्ष यह अभियान 30 दिन चलाया गया था, इस वर्ष यह अभियान 90 दिन चलाया गया। इससे न केवल जल-स्रोतों को पुनर्जीवन मिला, अपितु प्रदेश के भू-जल स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज प्रतिदिन गिरता जल-स्तर पूरे विश्व के समक्ष एक चुनौती है। हमने इस चुनौती को गंभीरता से स्वीकार किया है और इसके निराकरण के लिये निरंतर कार्य किया जा रहा है। आज सदन में इस विषय पर सकारात्मक चिंतन हुआ, इसके लिये सभी माननीय सदस्य बधाई के पात्र हैं।
हमारी सरकार प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिये निरंतर प्रयत्नशील है। आज से दो दशक पहले प्रदेश में सिंचाई का रकबा 7.5 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर लगभग 52 लाख हेक्टेयर हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में गत 19 महीनों में प्रदेश में सिंचाई का रकबा 7.5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। हमारा संकल्प है कि हम आगामी 2 वर्षों में इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तथा वर्ष 2030 तक 100 लाख हेक्टेयर करेंगे।
मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नदियों को जोड़ने का सपना पूरा हो रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जायेगी। बूंद-बूंद के लिये तरसता बुंदेलखण्ड क्षेत्र अब पूर्ण रूप से सिंचित और हरा-भरा होगा। इस योजना की लागत लगभग 44 हजार 605 करोड़ है और इससे लगभग 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी, 10 जिले एवं 200 ग्राम सिंचित होंगे, 44 लाख लोगों को इसका लाभ मिलेगा तथा 103 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल प्रदेश की दूसरी महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना है। मध्यप्रदेश एवं राजस्थान में आकार ले रही इस परियोजना की लागत लगभग 72 हजार करोड़ रुपये है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 13 जिले एवं 3 हजार 150 गाँव लाभान्वित होंगे, 6 लाख 14 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी तथा 40 लाख व्यक्ति लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश में आने वाली मेगा तापी रीचार्ज परियोजना विश्व की अनूठी भू-जल पुनर्भरण परियोजना है। इसके लिये प्रदेश का महाराष्ट्र सरकार के साथ समझौता हो गया है। लगभग 19 हजार 224 करोड़ रुपये की इस परियोजना की मध्यप्रदेश में 7 हजार 313 करोड़ लागत होगी। इससे लगभग एक लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी तथा प्रदेश के 2 जिले और 4 तहसीलें लाभान्वित होंगे।
प्रदेश में जल संवर्धन के लिये माइक्रो सिंचाई परियोजनाएँ प्रारंभ की गयी हैं। प्रदेश में पानी की एक-एक बूँद का उपयोग किया जा रहा है। इस दिशा में प्रेशराइज्ड पाइप सिंचाई पद्धति प्रदेश का अनूठा कार्य है। मोहनपुरा-कुंडालिया आदि सिंचाई परियोजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिये मध्यप्रदेश सरकार को वर्ष 2023 में “राष्ट्रीय जल अवार्ड” से सम्मानित किया गया। प्रदेश में 5 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा चुका है।
हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिये अत्यंत सजग है। पूरे प्रदेश में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत पूरे देश में लगभग 141 करोड़ पौधे लगाये जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश में पौधे लगाये गये हैं। जल संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।
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