मध्य-पूर्व में जारी तनाव और जंग जैसे हालात के बीच United Arab Emirates में 19 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इन लोगों पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इन लोगों ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर अपुष्ट और भ्रामक जानकारी साझा की, जिससे अफवाहों और भ्रम की स्थिति पैदा हुई। यूएई के कानून के अनुसार गलत जानकारी या अफवाह फैलाना गंभीर अपराध माना जाता है, खासकर जब वह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हो।
इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें Benjamin Netanyahu की मौत की अफवाह सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि इजराइल के प्रधानमंत्री की मौत हो गई है, लेकिन बाद में यह खबर पूरी तरह फर्जी साबित हुई।
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में नेतन्याहू को आराम से कॉफी पीते हुए देखा गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उनके बारे में फैलाई जा रही खबरें गलत थीं। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि युद्ध या संकट के समय फेक न्यूज कितनी तेजी से फैल सकती है और लोगों को भ्रमित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। खासकर अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या संवेदनशील हालात के दौरान गलत जानकारी बड़े स्तर पर तनाव और भ्रम पैदा कर सकती है।
इस घटना के बाद यूएई प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी ही साझा करें और अफवाहों से दूर रहें।
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