सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने बयानों और फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने ईरान को लेकर एक संभावित सैन्य निर्णय के बारे में कहा कि “दो सप्ताह में फैसला लिया जाएगा”। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी महत्वपूर्ण निर्णय के संदर्भ में “दो सप्ताह” शब्द का इस्तेमाल किया हो। यह वाक्यांश उनके राजनीतिक और प्रशासनिक बयानों का एक तरह से ट्रेडमार्क बन चुका है।
जब भी उनसे किसी जटिल या बड़े मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी जाती है, ट्रंप का जवाब अक्सर होता है – “अगले दो हफ्तों में सब पता चल जाएगा” या “दो सप्ताह में निर्णय होगा”। चाहे वह व्यापार समझौता हो, विदेश नीति पर प्रतिक्रिया या फिर आंतरिक सुधार, ट्रंप कई बार इस वाक्यांश का इस्तेमाल कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप यह शब्द रणनीति के तहत इस्तेमाल करते हैं। इससे उन्हें समय मिलता है, जनता और मीडिया का उत्साह बना रहता है, और वे अंतिम निर्णय से पहले स्थिति को परखने का मौका हासिल करते हैं। वहीं, कुछ आलोचक इसे उनकी निर्णय टालने की आदत बताते हैं।
हालिया उदाहरण में, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप अगले दो हफ्ते में यह तय करेंगे कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई की जाए या नहीं। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ट्रंप ने “दो सप्ताह” का सहारा लिया है।
इससे यह साफ है कि ट्रंप के लिए “दो सप्ताह” सिर्फ समय की इकाई नहीं, बल्कि एक राजनीतिक उपकरण है – जो उन्हें लचीलापन और पब्लिक अटेंशन दोनों देता है।
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