सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर क्रॉनिक डिज़ीज़ कंट्रोल द्वारा समन्वित, और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली एवं इम्पीरियल कॉलेज लंदन के सहयोग से किए गए एक नए अध्ययन ” टॉप स्पिन ” में भारत के 32 अस्पतालों में अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से ग्रसित 1,981 मरीजों की जांच की गई।

अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला कि तीन दो-दवा संयोजन थेरेपी –

एम्लोडिपिन + पेरिंडोप्रिल

एम्लोडिपिन + इंडापेमाइड

पेरिंडोप्रिल + इंडापेमाइड

– सभी समान रूप से प्रभावी और सुरक्षित थीं, और इन्होंने मरीजों का एंबुलटरी और क्लिनिक रक्तचाप प्रभावी रूप से कम किया।

टॉप स्पिन दक्षिण एशियाई आबादी में पहली बार यह परीक्षण करने वाला रैंडमाइज्ड अध्ययन है, जिसमें एक ही गोली में दो दवाओं के पहले-पंक्ति संयोजन का मूल्यांकन किया गया।

यह शोध नेचर मेडिसिन, जो विश्व के शीर्ष चिकित्सा शोध पत्रिकाओं में से एक है, में प्रकाशित हुआ है।

दक्षिण एशियाई लोग दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें भारत अकेले एक-छठे हिस्से के बराबर है। उच्च रक्तचाप एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जो पूरी दुनिया में एक अरब से अधिक वयस्कों को प्रभावित करता है — जिनमें से 30 करोड़ से अधिक अकेले भारत में रहते हैं।

उच्च रक्तचाप से निपटने के लिए नवीन समाधानों की आवश्यकता है, क्योंकि यह विश्व स्तर पर मृत्यु का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। वर्तमान उपचार दिशानिर्देशों में व्यापक रूप से दो-दवा संयोजन से उपचार की शुरुआत की सिफारिश की जाती है, विशेष रूप से एक ही गोली में दी जाने वाली थेरेपी को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन दक्षिण एशियाई आबादी के लिए इन संयोजनों की उपयुक्तता पर अब तक कोई अध्ययन नहीं हुआ था।

प्रमुख निष्कर्ष:

तीनों संयोजन रक्तचाप को कम करने में समान रूप से प्रभावी और मरीजों के लिए सुरक्षित पाए गए।

अध्ययन के प्रमुख वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

प्रो. डॉरैराज प्रभाकरण, सीसीडीसी के कार्यकारी निदेशक और अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक ने कहा:

“यह अध्ययन दर्शाता है कि दो दवाओं वाली एक गोली प्रतिदिन लेना भारतीय और दक्षिण एशियाई मरीजों में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने का एक सरल और प्रभावशाली तरीका हो सकता है। ये निष्कर्ष चिकित्सकों और नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। यदि इन गोलियों को भारत की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाए, तो देश में रक्तचाप नियंत्रण काफी हद तक बेहतर हो सकता है।”

प्रो. अम्बुज रॉय, एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर ने कहा:

“लगभग 70% मरीजों का रक्तचाप नियंत्रण में आ गया, जो मौजूदा राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत बड़ी उपलब्धि है। और ये गोलियां सुरक्षित और उपयोग में सरल थीं। यह अध्ययन उच्च रक्तचाप की देखभाल में एक स्पष्ट दिशा देता है।”

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