सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीएडीबी जर्मन डिजिटल शिक्षा अकादमी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ज्ञात हो कि डीएडीबी जर्मनी के बर्लिन स्थित एकमात्र जर्मन एडटेक कंपनी है, जो सम्पूर्ण यूरोप और एशिया में डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। यह समझौता भारत और जर्मनी के बीच शैक्षणिक सहयोग को सशक्त बनाते हुए छात्रों और शिक्षकों के लिए वैश्विक अवसरों के द्वार खोलेगा।
इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की ओर से प्रो-चांसलर अदिति चतुर्वेदी वत्स, एआईसी-आरएनटीयू एवं आईक्यूएसी के निदेशक नितिन वत्स, कुलसचिव संगीता जौहरी, प्रो-वाइस चांसलर संजीव गुप्ता एवं एजीयू रिसर्च डायरेक्टर रचना चतुर्वेदी उपस्थित रहीं। वहीं, डीएडीबी जर्मन एकेडमी ऑफ डिजिटल एजुकेशन की ओर से मैनेजिंग डायरेक्टर अमित दास, रीजनल हब मैनेजर नीलाद्रि बिहारी रे, बिजनेस पार्टनरशिप मैनेजर ओइंद्रिला घोष एवं संजीत यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।


समझौता ज्ञापन पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव संगीता जौहरी एवं डीएडीबी जर्मन एकेडमी ऑफ डिजिटल एजुकेशन की ओर से रीजनल हब मैनेजर नीलाद्रि बिहारी रे ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के अंतर्गत छात्र एवं संकाय विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, शैक्षणिक सहयोग, यूरोप में इंटर्नशिप, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के अवसर, नवाचार-आधारित लर्निंग और अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक अनुभव जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर कार्य किया जाएगा।इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि यह सहयोग रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत छात्रों और शिक्षकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मापदंडों के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जाती है। यह साझेदारी दोनों संस्थानों को बहु-विषयक शिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने, नवीन ज्ञान साझाकरण को प्रोत्साहित करने एवं वैश्विक सहभागिता के नए आयाम स्थापित करने में सक्षम बनाएगी।
इस अवसर पर डॉ. नितिन वत्स ने कहा कि यह एमओयू रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को सशक्त बनाएगा तथा विद्यार्थियों को वैश्विक अनुभव प्रदान कर उनके समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा। विश्वविद्यालय का यह प्रयास युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने और भविष्य के नेतृत्वकर्ता तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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