आज से शुरू हुए स्टार्टअप महाकुंभ ने देश में उद्यमिता की नई चेतना को मंच दिया है। यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि उस विचार की अभिव्यक्ति है जो भारत को नौकरी मांगने वालों से नौकरी देने वालों के देश में बदल रहा है। लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल का यह कथन कि “ग्राहकों पर फोकस ने उन्हें सफलता दिलाई,” महज एक अनुभव नहीं, बल्कि हर युवा उद्यमी के लिए सीख है।
आज भारत में स्टार्टअप्स न केवल रोजगार के नए द्वार खोल रहे हैं, बल्कि तकनीक, नवाचार और स्थानीय समाधान के जरिये समाज को बदल भी रहे हैं। ऐसे आयोजनों में देशभर के युवा, निवेशक और नीति-निर्माता जब एक साथ आते हैं, तो केवल व्यापार की नहीं, बल्कि विश्वास की भी बात होती है।
तीन दिनों तक चलने वाला यह महाकुंभ विचारों, अनुभवों और सपनों का संगम होगा, जहां से निकलने वाली प्रेरणा वर्षों तक दिशा दे सकती है। यह ज़रूरी है कि हम ऐसे आयोजनों को केवल तकनीकी संगोष्ठी न समझें, बल्कि इन्हें उस बदलाव की नींव मानें, जो भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है।
आज जब विश्व भारत को एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहा है, तब ऐसे प्लेटफॉर्म्स देश के युवाओं को अपनी उड़ान तय करने का अवसर दे रहे हैं। जरूरत है कि हम इस ऊर्जा को पहचानें, पोषित करें और एक ऐसा वातावरण बनाएं जहां हर आइडिया को अवसर मिले, और हर प्रयास को समर्थन।
स्टार्टअप महाकुंभ इस बात का प्रतीक है कि भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि संभावनाओं का केंद्र बन रहा है। यह बदलाव स्वागत योग्य है — और इसे स्थायी बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
#स्टार्टअप #भारत_की_उड़ान #उद्यमिता #नवाचार #आत्मनिर्भर_भारत