सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  : केंद्र सरकार की स्टैंड-अप इंडिया योजना ने हाशिए पर पड़े उद्यमियों को सशक्त बनाने के 7 साल पूरे कर लिए हैं। इसके तहत 61,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना की शुरुआत 5 अप्रैल, 2016 को हुई थी।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में बताया कि सरकार की स्टैंड-अप इंडिया योजना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित करते हुए अपने शुभारंभ के बाद से सात वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस योजना के तहत स्वीकृत ऋण अक्टूबर 2018 के 14,431.14 करोड़ रुपये से चार गुना से अधिक बढ़कर 17 मार्च, 2025 तक 61,020.41 करोड़ रुपये हो गए हैं।

आजादी का अमृत महोत्सव के बैनर तले वित्त मंत्रालय के द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इसका उद्देश्य इन समूहों को नए उद्यम स्थापित करने और समावेशी आर्थिक विकास में योगदान देने में सक्षम बनाना था। मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस योजना का काफी विस्तार हुआ है, जिसने देशभर में उद्यमिता, रोजगार सृजन और वित्तीय समावेशन पर परिवर्तनकारी प्रभाव दिखाया है।

स्टैंड-अप इंडिया के तहत प्राप्‍त उपलब्धियां-

वित्‍त मंत्रालय के मुताबिक स्टैंड-अप इंडिया योजना ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई है, जिसकी शुरुआत के बाद से स्वीकृत कुल राशि 31 मार्च, 2019 तक 16,085.07 करोड़ रुपये से बढ़कर 17 मार्च, 2025 तक 61,020.41 करोड़ रुपये हो गई है। यह एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दर्शाता है, जो देशभर में उद्यमियों को सशक्त बनाने में योजना के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

इस योजना ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति समुदायों और महिला उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सशक्तीकरण को प्रतिबिंबित किया है। इसके तहत मार्च 2018 से मार्च 2024 तक अनुसूचित जाति के खाते बढ़कर 9,399 से 46,248 हो गए और लोन की राशि बढ़कर 1,826.21 करोड़ रुपये से 9,747.11 करोड़ हो गयी। इसी तरह अनुसूचित जनजाति के खाते बढ़कर 2,841 से 15,228 हो गए, जबकि स्वीकृत लोन की राशि बढ़कर 574.65 करोड़ रुपये से 3,244.07 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, 2018 से 2024 तक महिला उद्यमियों के खाते बढ़कर 55,644 से 1,90,844 हो गए तथा स्वीकृत राशि बढ़कर 12,452.37 करोड़ रुपये से 43,984.10 करोड़ रुपये हो गई।

मंत्रालय ने कहा कि 5 अप्रैल, 2016 को अपने आरंभ के बाद से स्टैंड-अप इंडिया योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के अपने उद्देश्य पर कायम है। इस योजना का उद्देश्य नए व्यवसाय शुरू करने में मदद करने के लिए बैंक लोन प्रदान करके बाधाओं को तोड़ना है। बीते 7 वर्षों में इस योजना ने न केवल व्यवसायों को वित्त पोषित किया है, बल्कि इसने सपनों को पोषित किया है, आजीविका का सृजन किया है और पूरे भारत में समावेशी विकास को आगे बढ़ाया है। यह योजना केवल लोन के बारे में नहीं है; यह अवसर पैदा करने, बदलाव को प्रेरित करने और आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलने के बारे में है।

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