सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दुनिया की सबसे बड़ी क्लेफ्ट (होंठ और तालू विकृति) पर केंद्रित एनजीओ स्माइल ट्रेन ने “एवरी स्माइल बिलॉन्ग्स” नामक एक सशक्त फोटो प्रदर्शनी और समावेशन, गरिमा व आशा को समर्पित एक भावनात्मक अभियान की शुरुआत की। इस प्रदर्शनी का आयोजन किरण नादर म्यूज़ियम ऑफ आर्ट के सहयोग से किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध फोटोग्राफर कोमल बेदी सोहल द्वारा खींची गई यह प्रदर्शनी उन बच्चों की बिना फिल्टर की गई तस्वीरें प्रस्तुत करती है, जो क्लेफ्ट से पीड़ित हैं। ये तस्वीरें केवल सुंदरता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर फ्रेम में एक बच्चे की यात्रा का निर्णायक क्षण, उसकी भावनाएं और अभिव्यक्तियाँ संजोई गई हैं। इनका उद्देश्य है समाज की सोच को दया से सहानुभूति और कलंक से शक्ति की ओर स्थानांतरित करना।
इस आयोजन का उद्घाटन डॉ. सुजाता चौधरी, अतिरिक्त महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कला और सहानुभूति के माध्यम से मुख्यधारा में क्लेफ्ट के प्रति जागरूकता लाने का एक प्रशंसनीय प्रयास है।
ममता कैरोल, स्माइल ट्रेन की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और एशिया की रीजनल डायरेक्टर ने साझा किया,
“यह प्रदर्शनी स्माइल ट्रेन इंडिया की 25 वर्षों की यात्रा का प्रतीक है, जिसमें हमने भारत में 7,50,000 से अधिक क्लेफ्ट सर्जरी में सहयोग दिया है। हमारा उद्देश्य है कि क्लेफ्ट के प्रति समझ बढ़े और समय पर समावेशी उपचार को प्रोत्साहन मिले, ताकि हर बच्चा गरिमा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सके। हम किरण नादर म्यूज़ियम ऑफ आर्ट और कोमल बेदी सोहल के सहयोग के लिए आभारी हैं।”
किरण नादर म्यूज़ियम ऑफ आर्ट के साथ यह साझेदारी सामाजिक परिवर्तन के लिए कला को उत्प्रेरक के रूप में प्रस्तुत करती है। यह प्रदर्शनी बच्चों को समाज के सम्मानित सांस्कृतिक मंच पर केंद्र में रखकर उनके अस्तित्व, पहचान और अधिकार को मान्यता देती है।
कोमल बेदी सोहल ने इन तस्वीरों को बहुत सोच-समझ और संवेदनशीलता से खींचा है। हर मुस्कान और भावना के पीछे छिपी सुंदरता को उन्होंने बखूबी सामने लाया है।
उन्होंने कहा,
“हम एक ऐसी दुनिया में जीते हैं जहाँ पूर्णता की होड़ है। लेकिन इन बच्चों ने मुझे दिखाया कि वास्तविक सुंदरता क्या होती है – कच्ची, सच्ची और भावनाओं से परिपूर्ण। यह प्रदर्शनी इन ‘क्लेफ्ट योद्धाओं’ की मजबूती को सम्मानित करती है और एक गहरे मानवीय जुड़ाव की प्रेरणा देती है। मैं चाहती हूँ कि लोग रुकें, देखें और इन्हें वैसे ही स्वीकार करें जैसे ये हैं।”
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