सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सऊदी अरब सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए विदेशी नागरिकों और कंपनियों के लिए अपने रियल एस्टेट सेक्टर के दरवाज़े खोल दिए हैं। यह कानून जनवरी 2026 से लागू होगा और इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को ऑयल डिपेंडेंसी से बाहर निकालना है। यह कदम सऊदी अरब के विजन 2030 का हिस्सा है, जिसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने 2016 में लॉन्च किया था।
अब विदेशी इन्वेस्टर्स सऊदी की राजधानी रियाद, व्यापारिक केंद्र जेद्दा और अन्य क्षेत्रों में संपत्तियां खरीद सकेंगे। सऊदी कैबिनेट ने हाल ही में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। हाउसिंग मिनिस्टर माजिद बिन अब्दुल्लाह ने इस कानून को देश में रियल एस्टेट सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनके अनुसार यह फैसला सऊदी शहरों को वैश्विक निवेश का केंद्र बना सकता है।
हालांकि धार्मिक महत्व वाले मक्का और मदीना शहरों में प्रॉपर्टी खरीदने पर अब भी पाबंदी रहेगी। इन पवित्र शहरों में सिर्फ मुस्लिम ही विशेष शर्तों के साथ संपत्ति खरीद सकते हैं।
सऊदी स्टॉक एक्सचेंज (तदावुल) में लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों के 49% तक शेयर विदेशी निवेशक खरीद सकेंगे, बशर्ते ये कंपनियां मक्का और मदीना में प्रोजेक्ट्स विकसित कर रही हों।
रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी आगामी 180 दिनों में उन इलाकों और नियमों की सूची जारी करेगी, जहां विदेशी नागरिक संपत्ति खरीद सकेंगे।
यह निर्णय देश के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और 2030 तक 30 बिलियन डॉलर की आय का लक्ष्य पाने में मदद करेगा।
सऊदी का ‘विजन 2030’ महज़ एक आर्थिक योजना नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की भी दिशा तय करता है। इसी विजन के तहत NEOM नामक हाई-टेक शहर विकसित किया जा रहा है, जिसमें द लाइन जैसे फ्यूचरिस्टिक प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट पर अनुमानित 40 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे दुनिया के सबसे आधुनिक शहरों में शुमार किया जा रहा है।
यह कानून वैश्विक निवेशकों और भारतीय रियल एस्टेट समूहों के लिए भी एक बड़ा अवसर बन सकता है।
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