सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: केंद्र सरकार ने साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों का उद्देश्य देश को साइबर खतरों से बचाना और डिजिटल क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

प्रमुख बदलाव:

  1. साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग:
    टेलीकॉम कंपनियों को किसी भी साइबर घटना की जानकारी 6 घंटे के भीतर केंद्र सरकार को देना अनिवार्य होगा। यह कदम साइबर हमलों से तेज़ी से निपटने में सहायक होगा।
  2. डेटा एक्सेस के अधिकार:
    सरकार आवश्यकता पड़ने पर टेलीकॉम कंपनियों से डेटा की मांग कर सकती है, जिसका उपयोग केवल साइबर सुरक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
  3. साइबर सुरक्षा पॉलिसी:
    सभी कंपनियों को नेटवर्क सुरक्षा, जोखिम आकलन और प्रशिक्षण जैसे उपायों को शामिल करते हुए एक साइबर सुरक्षा पॉलिसी लागू करनी होगी।
  4. रैपिड एक्शन सिस्टम:
    कंपनियों को Chief Telecommunications Security Officer (CTSO) की नियुक्ति करनी होगी ताकि साइबर घटनाओं पर तेज़ी से कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
  5. IMEI रजिस्ट्रेशन अनिवार्य:
    देश में निर्मित और आयात किए गए सभी मोबाइल फोन के लिए IMEI नंबर का पंजीकरण अब अनिवार्य होगा। यह फर्जी उपकरणों और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाएगा।

विशेषज्ञ की राय:
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये नियम भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे। हालांकि, कंपनियों को इन्हें लागू करने में शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

आंकड़ों पर नज़र:

  • 2023 में भारत में 60 लाख साइबर हमले दर्ज हुए, जिनमें से 40% हमले टेलीकॉम सेक्टर पर हुए।
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि इन नए नियमों से 70% साइबर हमलों को रोका जा सकता है।

आम नागरिकों पर प्रभाव:

  • सुरक्षा: उपभोक्ताओं के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
  • पारदर्शिता: कंपनियां साइबर घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए बाध्य होंगी।
  • विश्वास: उपभोक्ताओं का डिजिटल सेवाओं में विश्वास बढ़ेगा।

निष्कर्ष:
सरकार की यह पहल भारत को साइबर खतरों से बचाने और डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी। हालांकि, डेटा गोपनीयता को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।