सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :रूस की संसद में आज भारत के साथ संभावित रक्षा समझौते पर वोटिंग होने वाली है। माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले मंज़ूर हो सकता है, ताकि द्विपक्षीय सुरक्षा साझेदारी के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके। प्रस्तावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकेंगे, जिससे रक्षा सहयोग का दायरा पारंपरिक हथियार खरीद-फरोख्त से आगे रणनीतिक पहुंच तक विस्तारित होगा।

भारत और रूस दशकों से रक्षा साझेदार रहे हैं, लेकिन बदलते भू-राजनीतिक माहौल में दोनों देश अपने रिश्ते को नए स्वरूप में ढाल रहे हैं। चीन, अमेरिका और पश्चिमी गठबंधनों की सक्रियता के बीच, यह समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।

यदि यह समझौता पास होता है, तो भारत को रूसी सैन्य अड्डों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और आर्कटिक/यूरोपीय समुद्री मार्गों तक पहुंच मिल सकती है। इसके बदले रूस को हिंद महासागर, विशेषकर भारत के सामरिक नौसैनिक ठिकानों का लाभ मिलेगा, जो उसके जहाजों और मिशनों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-रूस संबंध सिर्फ रक्षा खरीद तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सैन्य संचालन, मिशन समर्थन और संयुक्त अभ्यास जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार हो सकता है।

दूसरी ओर, यह समझौता पश्चिमी देशों की कूटनीति, विशेष रूप से अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।

समग्र रूप से, यह प्रस्ताव भारत-रूस संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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