सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :भारतीय मुद्रा रुपये ने एक बार फिर ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे टूटकर 90.74 के ऑलटाइम लो स्तर पर आ गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शेयर बाजार से विदेशी पूंजी के बाहर जाने का सीधा असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक स्तर पर ऊंची ब्याज दरें और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये की कमजोरी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। भारत में आयात बिल बढ़ने और चालू खाते के घाटे की चिंता ने भी रुपये की वैल्यू को प्रभावित किया है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि विदेशी फंड्स की निकासी का सिलसिला जारी रहा, तो रुपये में आगे भी अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए राहत की खबर हो सकती है, लेकिन आयात महंगा होने से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

कुल मिलाकर, रुपये की यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती मानी जा रही है, जिस पर सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों की नजर टिकी हुई है।

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