सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा एआईसीटीई–अटल प्रायोजित छह दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों से 300 से अधिक फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलर शामिल हुए।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का मुख्य विषय था—“एड्रेसिंग डेफमेशन क्लेम्स इन द एज ऑफ़ डीपफेक: प्रोटेक्टिंग सिक्योरिटी & प्राइवेसी इन डेमोक्रेटिक इंडिया”। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को डीपफेक तकनीक, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और कानूनी चुनौतियों की व्यापक जानकारी प्रदान करना था।
इस छह दिवसीय कार्यक्रम में कुल 13 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तकनीकी, सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोणों से डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा पर व्यापक चर्चा हुई। प्रमुख विषयों में एआई द्वारा डीपफेक का निर्माण, साइबर सुरक्षा उपाय, सोशल मीडिया में डीपफेक डिटेक्शन, ब्लॉकचेन आधारित समाधान, डेटा गोपनीयता, वैश्विक नीतिगत प्रतिक्रियाएं, और भविष्य के तकनीकी रुझान शामिल थे।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. अरुण कुमार (एनआईटी जालंधर) ने डिजिटल साक्षरता और जन-जागरूकता पर बल देते हुए बताया कि गलत जानकारी और डिजिटल मैनिप्युलेशन समाज के लिए खतरा हैं और नवीनतम एआई तकनीकों जैसे गेंस व डिफ़्यूज़न मॉडल की भूमिका पर प्रकाश डाला। वैभव जैन (आईआईटी इंदौर) ने डीपफेक की तकनीकी संरचना और गहन शिक्षण मॉडल्स के द्वारा पहचान की तकनीक पर चर्चा की। डॉ. महेश गौर ने एआई के उपयोग और दुरुपयोग की संभावना समझाई। हेमंत शर्मा ने सोशल मीडिया में गेंस और सीएनएन आधारित डिटेक्शन तकनीकों और कानूनी चुनौतियों को उजागर किया। डॉ. उदय प्रताप राव (एनआईटी पटना) ने साइबर सुरक्षा उपायों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के लिए रणनीतियाँ साझा कीं। डॉ. राजू हलदर (आईआईटी पटना) ने ब्लॉकचेन द्वारा मीडिया की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के उपाय प्रस्तुत किए। सुश्री अनन्या शर्मा ने नीति ढांचे, डेटा लेबलिंग, डिजिटल साक्षरता और एल्गोरिदमिक पारदर्शिता की आवश्यकता बताई। डॉ. हीना राठौर ने जनरेटिव एआई की मित्र और शत्रु भूमिका पर चर्चा की। डॉ. श्वेता भंडारी (मैनिट भोपाल) ने डेटा गोपनीयता के सांख्यिकीय पहलुओं को समझाया। डॉ. पवन दुग्गल ने भारत में एआई कानूनों की आवश्यकता और अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों को उजागर किया।
समन्वयक डॉ. पीयूष कुमार शुक्ला और सह-समन्वयक डॉ. राजीव पांडे ने डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन सत्र, ऑनलाइन टेस्ट और प्रतिभागियों के फीडबैक के साथ किया गया। यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए डीपफेक, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, और एआई नीति के बारे में ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक मंच साबित हुआ।
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