सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया और 'न्यूट्रल' रुख बरकरार रखा। RBI का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई संबंधी जोखिमों को देखते हुए फिलहाल सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

इस फैसले के बाद रियल एस्टेट उद्योग से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। डेवलपर्स और प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता से घर खरीदने वालों का विश्वास मजबूत होगा और आने वाले महीनों में आवासीय संपत्तियों की मांग बढ़ सकती है।

होम लोन EMI में नहीं होगा बदलाव

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा असर होम लोन पर पड़ता है। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की EMI फिलहाल स्थिर रहने की संभावना है। इससे मौजूदा और नए दोनों तरह के ग्राहकों को अपने वित्तीय निर्णय लेने में आसानी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह स्थिति अनुकूल है क्योंकि उन्हें निकट भविष्य में ब्याज दरों में अचानक वृद्धि की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

घर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ेगा

रियल एस्टेट बाजार में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है वित्तीय स्थिरता। जब ब्याज दरें स्थिर रहती हैं तो खरीदार लंबी अवधि की निवेश योजनाओं को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में आवासीय बाजार में जो गति देखने को मिली है, उसे बनाए रखने में यह फैसला मददगार साबित हो सकता है। स्थिर EMI और ऋण लागत खरीदारों को निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

मिड-सेगमेंट और प्रीमियम हाउसिंग को मिल सकता है फायदा

रियल एस्टेट सलाहकारों के अनुसार सबसे अधिक लाभ मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट को मिल सकता है। इन वर्गों में खरीदार आमतौर पर बैंक ऋण पर अधिक निर्भर रहते हैं। जब ऋण लागत स्थिर रहती है तो खरीदारी के फैसले तेज हो जाते हैं।

डेवलपर्स का मानना है कि त्योहारी सीजन और वर्ष के दूसरे हिस्से में लॉन्च होने वाली परियोजनाओं को भी इस फैसले से सकारात्मक समर्थन मिलेगा।

डेवलपर्स को भी मिला योजना बनाने का अवसर

केवल खरीदार ही नहीं, बल्कि रियल एस्टेट कंपनियां भी इस फैसले से राहत महसूस कर रही हैं। ब्याज दरों में स्थिरता रहने से डेवलपर्स को नई परियोजनाओं की लागत और वित्तीय योजना तैयार करने में आसानी होती है।

रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलती ब्याज दरों की तुलना में स्थिर माहौल व्यवसायिक निर्णयों के लिए अधिक अनुकूल होता है।

RBI ने क्यों नहीं बदली रेपो रेट?

RBI ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये पर दबाव और संभावित महंगाई जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल "वेट एंड वॉच" रणनीति अपनाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं, तो भविष्य की नीतिगत बैठकों में ब्याज दरों को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।

रियल एस्टेट बाजार के लिए क्या हैं संकेत?
होम लोन EMI में फिलहाल स्थिरता बनी रहेगी।
नए घर खरीदने वालों का विश्वास मजबूत होगा।
डेवलपर्स को परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
आवासीय संपत्तियों की मांग में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए रियल एस्टेट एक आकर्षक विकल्प बना रह सकता है।
निष्कर्ष

RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला भले ही तत्काल EMI राहत नहीं देता, लेकिन यह बाजार को स्थिरता का संदेश जरूर देता है। रियल एस्टेट क्षेत्र का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता खरीदारों का भरोसा बढ़ाएगी और आने वाले महीनों में घरों की बिक्री को नई गति मिल सकती है। ऐसे समय में जब आवासीय बाजार लगातार विस्तार कर रहा है, RBI का यह निर्णय सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


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