सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोध शिखर 2026 का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों और समाजोन्मुख अनुसंधान पर केंद्रित एक प्रभावी वैश्विक मंच के रूप में उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।
मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी-इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक तकनीकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक शोध में इनका उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति संतोष चौबे ने आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर हालिया प्रकाशन भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को दर्शाता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताया।
विशिष्ट वक्ता माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने भारत के अनुभव साझा करते हुए कहा कि शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। वहीं डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कृषि और पर्यावरण संरक्षण में नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. रजत संधीर, पंजाब यूनिवर्सिटी ने कहा कि विश्वविद्यालय, किसान, उद्योग और सरकार के समन्वय से शोध को व्यावहारिक रूप मिल रहा है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलगुरु प्रो. रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत उद्बोधन दिया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व शोध उपलब्धियों की जानकारी दी। सम्मेलन में “सी. वी. रमन विज्ञान सम्मान” से प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विज्ञान लेखकों को सम्मानित किया गया।
सम्मेलन के अंतर्गत दस विषयों पर तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएँ, विज्ञान कवि सम्मेलन तथा विज्ञान संचार गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर स्मारिकाओं और पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।

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