सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय प्राचीन वास्तुकला और विज्ञान का अद्भुत उदाहरण भी है। मंदिर की संरचना को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह हजारों वर्षों तक बिना किसी नुकसान के मजबूती से खड़ा रह सके। मंदिर निर्माण में लोहे की एक भी कील का उपयोग नहीं किया गया, ताकि समय के साथ जंग लगने से संरचना कमजोर न हो। इसके बजाय पूरी इमारत को पारंपरिक इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया है, जिसमें केवल विशाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

मंदिर के निर्माण में उपयोग किए गए गुलाबी बलुए (सैंडस्टोन) और ग्रेनाइट इतने मजबूत हैं कि मौसम, भूकंप और समय का प्रभाव इन पर न्यूनतम पड़ता है। मूर्ति निर्माण के लिए भी एक विशेष प्रकार के श्याम शिला का चयन किया गया, जिस पर पत्थर खाने वाले कीड़े प्रभाव नहीं डालते। इसी से जुड़ी प्राचीन कथा बताती है कि ऐसे पत्थरों को देवस्थानों में इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से सुरक्षित और अत्यंत टिकाऊ होते हैं।

इन्हीं अनोखी तकनीकों, पत्थरों की गुणवत्ता और पारंपरिक इंजीनियरिंग की वजह से राम मंदिर आने वाली कई सदियों तक बेहद मज़बूती से खड़ा रहेगा और भारतीय संस्कृति का गौरव बना रहेगा।

#राममंदिर #मंदिरनिर्माण #अयोध्यानगर #भारतीयवास्तुकला #धार्मिकसमाचार #प्राचीनतकनीक #मूर्तिनिर्माण