सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का केंद्रीय विषय “चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास” है। इसका उद्देश्य पंचकोशीय शिक्षा पद्धति के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों एवं समाज में मूल्यों की पुनर्स्थापना और संतुलित व्यक्तित्व विकास पर व्यापक मंथन करना है।


मुख्य अतिथि एवं वक्ता अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास) ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि तकनीकी उन्नति के दौर में चरित्र निर्माण की आवश्यकता और भी अधिक हो गई है। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि संस्कारों का संवाहक बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शामिल पंचकोशीय विकास को शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन बताया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य आत्मबोध, सहानुभूति और नेतृत्व के साथ संस्कारयुक्त नागरिक बनाना होना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा आधारित शिक्षा प्रणाली को महत्वपूर्ण बताया और “विश्वरंग” तथा “अंतर्राष्ट्रीय हिंदी केंद्र” जैसी पहल को वैश्विक स्तर पर भारतीय भाषा और संस्कृति के संवाहक बताया।


प्रथम दिवस में निदेशक मनोहर भंडारी ने “अन्नमय कोश” पर और निदेशक दिनेश दवे ने “मनोमय कोश एवं चरित्र निर्माण” पर गहन विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन अमिताभ सक्सेना ने किया।


इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों – “विश्व में हिंदी” (जवाहर कर्णावत), “परंपरा और आधुनिकता” (संतोष चौबे), और “सोलह संस्कार और रीतियाँ” (विनीता चौबे) – का विमोचन किया गया। साथ ही “अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड” का पोस्टर भी जारी हुआ।

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