सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देहरादून में आयोजित पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया की 47 वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “विकसित भारत 2047: इमर्जिंग ग्रोथ, प्रिज़र्विंग रूट्स” विषय पर केंद्रित रही।
इस अवसर पर डॉ. योगेश पटेल, सहायक प्राध्यापक, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं संयुक्त सचिव, पीआरएसआई भोपाल चैप्टर की पीएचडी शोध-आधारित पुस्तक मध्य प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के मीडिया प्रबंधन पर एक विश्लेषणात्मक अध्ययन का विमोचन किया गया।
पुस्तक का विमोचन पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक, मास्को स्थित एकोस के डिप्टी चेयरमैन, जनरल डायरेक्टर एवं पार्टनर-को-फाउंडर डॉ. मिशेल मास्लोव तथा पीआरएसआई पूर्व क्षेत्र की उपाध्यक्ष अनु मजूमदार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर पीआरएसआई पश्चिम क्षेत्र के उपाध्यक्ष एस. पी. सिंह भी मंचासीन रहे।
पुस्तक समीक्षा:
यह पुस्तक मध्य प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा अपनाई गई मीडिया प्रबंधन रणनीतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें चुनावी प्रचार, प्रेस विज्ञप्तियाँ, मीडिया अभियान, जनसंपर्क गतिविधियाँ तथा जनमत निर्माण में मीडिया की भूमिका को शोधपरक और तथ्यात्मक ढंग से समझाया गया है। सरल भाषा और अकादमिक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक शोधार्थियों, मीडिया विद्यार्थियों, पत्रकारों एवं राजनीतिक संचार से जुड़े पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है।
प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए प्रासंगिकता:
यह पुस्तक विशेष रूप से प्रथम बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें यह समझने में सहायता करती है कि राजनीतिक दल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। पुस्तक युवाओं में मीडिया साक्षरता, विवेकपूर्ण सोच और जागरूक नागरिकता को प्रोत्साहित करती है, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सूचित और जिम्मेदार भागीदारी कर सकें।
लेखक डॉ. योगेश पटेल के अनुसार मीडिया अब केवल सूचना का माध्यम नहीं रहा; यह लोकतंत्र की धुरी बन गया है। मेरी यह पुस्तक युवाओं, विशेषकर प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं को यह समझने में मदद करती है कि राजनीतिक दल मीडिया के माध्यम से कैसे संदेश पहुँचाते हैं और जनमत निर्माण करते हैं। मेरा लक्ष्य है कि युवा जागरूक, विवेकपूर्ण और जिम्मेदार नागरिक बनें, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सूचित निर्णय ले सकें।
इस अवसर पर शोधकर्ता को पीआरएसआई के वरिष्ठों, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं सहयोगियों के साथ-साथ माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के उनके शिक्षकों ने भी इस शैक्षणिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं।
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