सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, भोपाल (राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, नई दिल्ली का एक क्षेत्रीय केंद्र); ने ग्रीष्मकालीन प्रकृति अध्ययन कार्यक्रम – हरित शावक के प्रतिभागियों के लिए प्रकृति चित्रकला एवं ग्रीष्मकालीन प्रकृति अध्ययन कार्यक्रम हरित किशोर के प्रतिभागियों के लिए हस्त निर्मित कागज निर्माण केंद्र का भ्रमण एवं वन्य प्राणियों पर फिल्म शो का आयोजन किया गया।

प्रकृति चित्रकला कार्यक्रम के दौरान संग्रहालय के चित्रकार निदेशक नवीन कुमार ने प्रतिभागियों को पर्वत, झरना, नदियाँ, बादल, वृक्ष, जानवर आदि को चित्रित करना सिखाया तथा बच्चों ने स्वयं भी उत्साहपूर्वक चित्रित किया। इस कार्यक्रम में 19 प्रतिभागियों ने भाग लिया। संग्रहालय के वैज्ञानिक- सी एवं कार्यक्रम समन्वयक मानिक लाल गुप्त ने बताया कि प्रकृति चित्रकला केवल एक कला गतिविधि नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति हमारी संवेदनशीलता और जागरूकता को दर्शाने का एक सुंदर माध्यम है। जब हम चित्रित करते हैं, तो हम न सिर्फ उनकी सुंदरता को सराहते हैं, बल्कि यह भी समझते हैं कि प्रकृति के बिना हमारा जीवन सम्भव ही नहीं है।

ग्रीष्मकालीन प्रकृति अध्ययन कार्यक्रम- हरित किशोर के प्रतिभागियों के लिए हस्त निर्मित कागज निर्माण केंद्र का अध्ययन भ्रमण एवं वन्य प्राणियों पर फिल्म शो आयोजित किया गया जिसके अंतर्गत फिल्म शो के दौरान जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण तथा वन्य प्राणियों के महत्व एवं संरक्षण पर आधारित फिल्में जैसे कान्हा, जलवायु परिवर्तन प्रभाव आदि का प्रदर्शन किया गया इसी क्रम में, प्रतिभागियों को रद्दी कागज से उपयोगी कागज बनाने की विधि की जानकारी प्रदान करने के लिए पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को), भोपाल के रद्दी कागज के पुनर्चक्रीकरण इकाई में अध्ययन भ्रमण पर ले जाया गया।
जिसके अंतर्गत के सुनील कुमार एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को बताया कि रद्दी कागज से उपयोगी कागज को सबसे पहले रैग कटर मशीन कि सहायता से छोटे-छोटे टुकड़े में काट दिया जाता है उसके पश्चात उन टुकड़ों को हाइड्रा पल्पर में पानी के साथ डाल दिया जाता है जहाँ पर उस रद्दी कागज़ कि लुगदी बन जाती है। निर्मित कागज़ को मजबूत बनाने के लिए इस लुगदी में होज़री के कपड़े की लुगदी तथा देवदार के गोंद को मिलाकर बीटर मशीन में डालकर लुगदी बनाकर आटो वैट में लगी छन्नी की सहायता से गीला कागज़ बनाया जाता है। इस गीले कागज से 60 प्रतिशत पानी को स्क्रू प्रेस मशीन से बाकी धूप में सुखाकर निकाला जाता है। अंत में पेपर प्रेस एवं पेपर कटर की सहायता से वांछित आकार का कागज़ बनाया जाता है। इसी प्रकार, सभी प्रतिभागियों ने भी अपने हाथों से कागज़ बनाना सीखा।
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