प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान 92 मिनट का विस्तृत और प्रभावी भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए और अपनी सरकार की नीतियों को ‘नेशन फर्स्ट’ की विचारधारा से प्रेरित बताया। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप लगाए और कहा कि पार्टी ने हमेशा एक परिवार को प्राथमिकता दी, जबकि उनकी सरकार का लक्ष्य समग्र विकास रहा है।
प्रधानमंत्री का यह भाषण महज राजनीतिक आलोचना नहीं था, बल्कि इससे भाजपा और कांग्रेस की कार्यशैली और विचारधारा के बीच का स्पष्ट अंतर उभरकर सामने आया। उन्होंने कांग्रेस के ऐतिहासिक निर्णयों की समीक्षा करते हुए दावा किया कि पार्टी ने बाबा साहब अंबेडकर के प्रति अन्याय किया और उन्हें चुनाव में हराने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कभी अंबेडकर को भारत रत्न देने योग्य नहीं समझा, जबकि आज उसे मजबूरन ‘जय भीम’ कहना पड़ रहा है।
इस भाषण में कांग्रेस के लिए एक स्पष्ट संदेश था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस को अपनी ‘लकीर लंबी करनी चाहिए’ यानी अपनी नीतियों और विचारधारा को मजबूत कर जनता का विश्वास जीतना चाहिए, न कि दूसरों की लकीर छोटी करने की राजनीति पर निर्भर रहना चाहिए। यह टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़ा करती है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस ने अधिकतर समय भाजपा की आलोचना करने में लगाया है, लेकिन क्या यह रणनीति उसे राजनीतिक लाभ दिला रही है, यह एक बड़ा प्रश्न है।
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि खिलौनों, वैक्सीन, दवाओं, आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने खादी और ग्रामोद्योग के टर्नओवर के 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का भी जिक्र किया। यह आंकड़े निश्चित रूप से मोदी सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में हुए प्रयासों को दर्शाते हैं। हालांकि, इन दावों का गहन विश्लेषण आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये विकास कितने व्यापक और प्रभावी हैं।
इस भाषण को महज संसदीय बहस तक सीमित नहीं देखा जा सकता। इसे भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है। कांग्रेस पर आक्रामक प्रहार, अपनी नीतियों का गुणगान और सरकार की उपलब्धियों को गिनाना यह संकेत देता है कि भाजपा कांग्रेस की कमजोरियों को उजागर करने और अपने विकास मॉडल को जनता के सामने रखने की रणनीति अपना रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस आलोचना का जवाब किस प्रकार देती है। क्या वह केवल भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर हमले करने तक सीमित रहेगी, या फिर एक ठोस वैकल्पिक नीति और विकास मॉडल प्रस्तुत करेगी? यदि कांग्रेस को भाजपा के ‘नेशन फर्स्ट’ नैरेटिव को टक्कर देनी है, तो उसे अपनी विचारधारा और नेतृत्व को जनता के बीच और अधिक प्रभावी तरीके से पेश करना होगा।
राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तीखे अंदाज में कांग्रेस की राजनीति को सवालों के घेरे में खड़ा किया, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह बहस और तेज़ होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस चुनौती का सामना कैसे करती है—क्या वह अपनी राजनीति में बदलाव लाएगी, या फिर केवल भाजपा की आलोचना तक सीमित रह जाएगी?

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