सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में कनेक्टिकट के हार्टफोर्ड शहर में आयोजित एक कार्यक्रम में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रसिद्ध इतिहासकार हीदर कॉक्स के साथ संवाद करते हुए ओबामा ने कहा कि अमेरिका एक ऐसे रास्ते पर बढ़ रहा है, जो हंगरी जैसी अधिनायकवादी प्रवृत्तियों की ओर इशारा करता है, जहां चुनाव तो होते हैं, परंतु जनता की वास्तविक आवाज को अनसुना कर दिया जाता है।
ओबामा ने कहा कि आज अमेरिका में लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने ट्रम्प सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के भीतर और बाहर से अब गलत कामों का विरोध नहीं हो रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संरचना डगमगाने लगी है। उन्होंने चेताया कि जब लोग सच से हार मान लेते हैं, तभी तानाशाही पनपती है।
उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और केजीबी की रणनीतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब जनता को सच का भ्रम होने लगे और हर ओर झूठ ही फैलाया जाए, तो लोग भ्रमित होकर लोकतंत्र से दूर हो जाते हैं। ओबामा ने कहा, “जब लोग यह मानने लगते हैं कि अब कुछ भी मायने नहीं रखता, वहीं से लोकतंत्र के पतन की शुरुआत होती है।”
पूर्व राष्ट्रपति ने अमेरिका की एक बड़ी राजनीतिक पार्टी (रिपब्लिकन पार्टी) की भी आलोचना की, जिसमें कई नेता जानते हुए भी झूठ का समर्थन करते हैं। उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में आगे आने की अपील की और कहा कि लोकतंत्र अपने आप नहीं चलता – इसके लिए जागरूक नागरिकों, न्यायपालिका, मीडिया और सरकार के भीतर ईमानदार अफसरों की जरूरत होती है।
अंत में ओबामा ने कहा कि वह अब भी आशावादी हैं और युवाओं को सलाह दी कि वे संवाद, सहमति और सकारात्मक सोच के जरिए बदलाव लाएं। उन्होंने कहा कि गुस्सा जरूरी है, लेकिन बदलाव के लिए जोड़ने वाली सोच जरूरी है।
#बराक_ओबामा #अमेरिका_लोकतंत्र #अमेरिका_समाचार #ओबामा_बयान #अमेरिकी_राजनीति #लोकतंत्र_का_भटकाव #अंतरराष्ट्रीय_समाचार