सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ई प्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बुजुर्गों की इलाज में फिजियोथैरेपी का कारगर इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है और किस तरह उनकी तकलीफों को कम किया जा सकता है। प्रदेश के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में काम करने वाले फिजियोथैरेपिस्टों को भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में इसकी जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय स्वस्थ्य मिशन (एनएचएम) के राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (एनपीएचसीई) के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण संचालित होगा। इस कार्यक्रम में भोपाल के जाने—माने फिजियोथैरेपिस्ट व बीएमएचआरसी के फिजियोथैरेपिस्ट प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बीएमचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव, एनपीएचसीई में अतिरिक्त निदेशक शरद तिवारी, एनएचएम के हीमोग्लोबिनोपैथी मिशन में उपनिदेशक रूबी खान व बीएमएचआरसी के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख संदीप सोरते ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया।
इस मौके पर डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि बुजुर्गों की बीमारियों के इलाज और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में फिजियोथेरेपी अहम भूमिका निभाती है। यह जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, और गठिया जैसी समस्याओं को कम करती है। स्ट्रोक, पार्किंसंस, और श्वसन समस्याओं में यह शरीर की ताकत और गतिशीलता बढ़ाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि फीजियोथैरेपिस्ट के प्रशिक्षण में पहली बार हीमोग्लोबिनोपैथी को शामिल किया गया है।

पूरा एक सत्र इस विषय पर समर्पित किया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सिकल सेल एनीमिया के उपचार में भी फिजियोथैरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सिकल सेल के मरीजों को होने वाले असहनीय दर्द के प्रबंधन में और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में यह सहायक है। फिजियाथैरेपी मांसपेशियों की ताकत भी बढ़ाती है।

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