सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक गरिमामय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक सी.सी. त्रिपाठी ने सभी शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में गुरुओं के सम्मान की परंपरा प्राचीन गुरुकुल प्रणाली से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन गुरुओं ने न केवल ज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया, बल्कि समाज को दिशा देने और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रो. त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युग में भी गुरु का स्थान सर्वोपरि है। अच्छे ज्ञान की प्राप्ति के लिए विनयशीलता आवश्यक है, और एक सशक्त शिक्षा नीति वही है जो राष्ट्र की आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करे। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों, सिद्धांतों और नैतिकताओं का भी संचार करते हैं। छात्रों को सीखते और प्रगति करते देख जो संतोष और आनंद प्राप्त होता है, वह शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान के आगामी शैक्षणिक रोडमैप की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें पाठ्यक्रम में पंचकोशी शिक्षा के तत्वों को शामिल करने की योजना साझा की गई। उन्होंने कहा कि इससे न केवल उत्कृष्ट शिक्षक, बल्कि संतुलित एवं सशक्त छात्र निर्माण की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा।
इस अवसर पर वंदना त्रिपाठी सहित संस्थान के सभी डीन — प्रो. आर.के. दीक्षित, प्रो. संजय अग्रवाल, प्रो. पी.के. पुरोहित, प्रशासनिक अधिकारी मेजर निशांत ओझा, गौतम कुमार, समस्त फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में शिक्षकों के योगदान को सराहा गया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
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