सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल में राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा “राजभाषा हिंदी के प्रयोग एवं अनुपालन सम्बन्धी” विषय पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक और नराकास के अध्यक्ष प्रो. चंद्र चारु त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी बड़े उद्देश्य को हासिल करने के लिए एकजुटता और संवाद जरूरी है, और इसमें भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी वैश्विक भाषा बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। मनुष्य के विकास की नींव उसकी मातृभाषा में ही होती है। भारत की स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में लोगो को जोड़ने में हिंदी भाषा का विशेष योगदान रहा है। निटर भोपाल का राजभाषा प्रकोष्ठ राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार की दिशा में सतत प्रयत्नशील है, जिसके परिणामस्वरूप संस्थान को गत 02 वर्षों में 07 पुरुस्कार विभिन्न राष्ट्रीय मंचो से प्राप्त किये है।
विषय विशेषज्ञ में रूप में आइसर भोपाल के राजभाषा अधिकारी भारत भूषण देशमुख ने “कार्यालीन अनुवाद” समस्त कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बताया कि अनुवादक को शब्दों के जोड़-घटाव में स्वतंत्रता होती है, लेकिन भावनाओं का सही रूप में संरक्षण करना अनुवादक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्मचारियों से यह आग्रह किया कि वे हिंदी को अपने मूल कार्यों में बढ़ावा दें और अंग्रेजी को केवल अनुवाद की भाषा के रूप में उपयोग करें। अन्य विशेषज्ञ के रूप में संजय त्रिपाठी, सचिव-नराकास ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” अनुवाद टूल्स” पर व्याख्यान दिया एवं संस्थान के राजभाषा प्रकोष्ठ की सचिव बबली चतुर्वेदी ने “संघ की राजभाषा नीति, राजभाषा अधिनियम 1963 एवं राजभाषा नियम 1976” विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
राजभाषा समन्वयक पी.के. पुरोहित ने संस्थान की राजभाषा की उपलब्धियों का वर्णन करते हुए कहा कि हिंदी विश्व पटल पर अपना सिक्का जमा चुकी है। हिंदी का वैश्विक विस्तार भाषा से संस्कृति तक है। विश्व के कई विश्वविद्यालयों में आज हिंदी को पढ़ाया जा रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदी को हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना ही नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर भी इसका अधिक से अधिक उपयोग करना आवश्यक है। कार्यशाला में संस्थान के साथ-साथ गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।
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