सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल /   नई दिल्ली   :  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल का भारत की जीडीपी ग्रोथ पर सीमित असर पड़ेगा। शुक्रवार को चौथे कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बाहरी दबाव और व्यापार-ऊर्जा असंतुलन से निपटने में सक्षम है। सीतारमण ने बताया कि भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था (डेवलप्ड इकोनॉमी) बनना है। इसके लिए 8% की आर्थिक वृद्धि दर जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ की रीढ़ घरेलू कारक (डोमेस्टिक फैक्टर्स) हैं, और वैश्विक अनिश्चितता को सिर्फ अस्थायी व्यवधान नहीं बल्कि संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब बंद अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि वैश्विक संपर्क बनाए रखते हुए घरेलू उत्पादन और संसाधनों को मजबूत करना है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा जीडीपी ग्रोथ अनुमान वृद्धि 6.5% से 6.8% तक का जिक्र किया। सीतारमण ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक संस्थानों में बदलाव हो रहा है, और निवेश व ऊर्जा मूल्य अस्थिरता जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूत स्थिति में है। इस साल कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव की थीम ‘उथल-पुथल भरे समय में समृद्धि की तलाश’ है। 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। कॉन्क्लेव का समापन 5 अक्टूबर को केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे।

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