सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य भारत के पहले कौशल विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईसीएआई-2026) का भव्य समापन हुआ। समापन सत्र में एआई एक्सपर्ट वैभव सिसिन्टी के एआई की दौड़ में कैसे जीतें विषय पर की-नोट सेशन के साथ नवोन्मेष 2026 की प्रतियोगिताओं का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथियों में आर. पी. दुबे (कुलपति, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय), अमिताभ सक्सेना (कार्यकारी निदेशक, आईटीडीपीआर), एस. के. जैन (कुलपति, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय), सिद्धार्थ चतुर्वेदी (चांसलर, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी) तथा विजय सिंह (कुलपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। अमिताभ सक्सेना ने तकनीक के विकास की यात्रा और कंप्यूटिंग से लेकर आधुनिक एआई तक के उन्नत चरणों पर प्रकाश डाला। एस. के. जैन ने डीप लर्निंग और मल्टीडिसिप्लिनरी लर्निंग के माध्यम से शिक्षण-अधिगम को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने आईसीएआई जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सेतु बताते हुए एआई के योगदान को उजागर किया।

विजय सिंह ने कहा कि एआई तेजी से विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही है और विश्वविद्यालयों को छात्रों को नवीन तकनीकों और शोध के अवसरों से जोड़ना आवश्यक है। सम्मेलन में 12 एआई टूल्स का प्रदर्शन, 21 पोस्टर प्रस्तुतियाँ और लगभग 400 शोध प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिनमें से 6 श्रेष्ठ शोध-पत्रों को विशेष पुरस्कार मिले। वैभव सिसिन्टी ने की-नोट सेशन में एआई नेटिव फ्रेशर बनने के चार स्टेप बताए: फ्लूएंसी (एआई टूल्स को ट्राय करना), आर्केस्ट्रेशन (नई समस्याओं को सॉल्व करना), बिल्ड (छोटे एप्स/सॉफ्टवेयर बनाना) और डॉक्यूमेंट (कंटेंट क्रिएशन एवं शेयर करना)। उन्होंने कहा कि एआई नेटिव फ्रेशर लगातार सीखने और प्रयोग करने से तीन मिड-लेवल कर्मचारियों के बराबर कौशल हासिल कर सकता है। वैभव ने युवाओं को एआई को अपनाने, रचनात्मक सोच विकसित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनका संदेश स्पष्ट था कि तकनीक सीखना पर्याप्त नहीं, बल्कि प्रयोग, निरंतर सीखना और समस्या समाधान की क्षमता ही सफलता की कुंजी है।
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