नई दिल्ली । राष्ट्रीय भाला फेंक कोच उवे होन का टोक्यो ओलंपिक के साथ ही अनुबंध समाप्त हो गया है। जिसे अब बढ़ाये जाने की कोई संभावनाएं नहीं हैं। जर्मनी के होन को नवंबर 2017 में एक साल के लिए मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। होन ने अपने वेतन में 50 फीसदी इजाफे और इसे करमुक्त करने के अलावा विमान के प्रथम श्रेणी के टिकटों की मांग की थी।
होन का शुरुआती अनुबंध प्रतिवर्ष एक करोड़ नौ लाख रुपये का था। इसके अलावा रहना, खाना, मेडिकल सुविधा और छुट्टियों में यात्रा की सुविधा भी दी जानी थी। अक्तूबर 2020 में अनुबंध पर दोबारा हस्ताक्षर के समय वह चाहते थे कि इसे बढ़ाकर प्रतिवर्ष एक करोड़ 64 लाख रुपये किया जाए। जिसे भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने खारिज कर दिया है क्योंकि जिन खिलाड़ियों का उन्होने प्रशिक्षण दिया था उनका प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा है।
साइ ने कहा कि उसने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की सिफारिश पर एक अन्य विदेशी भाला फेंक कोच बायो-मैकेनिक विशेषज्ञ डॉ. क्लॉस बार्टोनीट्ज को भी नियुक्त किया है। होन अपनी नियुक्ति के बाद से 2018 एशियाई खेलों तक लगभग एक साल के लिए ओलंपिक स्वर्ण विजेता नीरज चोपड़ा के भी कोच रहे पर नीरज को उनका तरीका पसंद नहीं आया जिससे वह क्लॉस के साथ ट्रेनिंग करने लगे।
इसपर नीरज ने कहा था कि वह होन का सम्मान करते हैं पर जर्मनी के इस कोच की ट्रेनिंग प्रणाली और तकनीकी रवैया उन्हें पसंद नहीं था। होन ने शिवपाल और महिला खिलाड़ी रानी को भी ट्रेनिंग द थी और इन दोनो का ही ओलंपिक में प्रदर्शन उम्मीद के अनुरुप नहीं रहा। यहां तक कि ओलंपिक में विफल रहने के बाद रानी ने उनसे ट्रेनिंग लेने से इंकार कर दिया था।