सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय तक समावेशी पहुँच को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए श्रवण बाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया। यह पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से तथा माननीय उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। इस पहल का नेतृत्व माननीय न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया, जबकि माननीय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं कार्यपालक अध्यक्ष ने मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इंदौर ने किया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न्याय की सबसे मानवीय विधाओं में से एक है, जिसमें टकराव के स्थान पर संवाद और आपसी समझ के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त होता है। सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने मध्यस्थता में समझ, सहानुभूति और संवाद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रवण बाधित प्रतिभागियों को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करेगा। प्रशिक्षण का संचालन अनुभवी प्रशिक्षक अनुजा सक्सेना और श्रीमती रीमा भंडारी कर रही हैं। इसमें प्रतिभागियों को मध्यस्थता के दर्शन, संवाद तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ की नैतिकता तथा व्यावहारिक अभ्यास पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संप्रेषण, संरचित संवाद, कॉकस तकनीक और सहमति आधारित समाधान जैसी विधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के विधिक ढाँचे, सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 और मध्यस्थों के व्यावसायिक मानकों से भी परिचित कराया जा रहा है। इस पहल में आनंद सर्विस सोसायटी का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। इस अवसर पर प्रिंसिपल रजिस्ट्रार अनुप कुमार त्रिपाठी, सचिव शिवराज सिंह गवली, उप सचिव अनिरुद्ध जैन और जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से मध्यस्थता को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया गया।

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