सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत में हर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन हो रहे हैं। 2047 तक भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए हर क्षेत्र में परिवर्तन की आवश्यकता है। भारतीयता के भाव का उदघोष होता रहे इसके लिए तंत्र और पद्धति विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात इंदर सिंह परमार, मंत्री, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग ने कही। वे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक -2025 (वीबीएसए) विषय पर आयोजित आनन्दशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस एक दिवसीय आनंदशाला का आयोजन मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया।
मंत्री परमार ने आगे कहा कि इस आनन्दशाला में कुलगुरुओं और शिक्षाविदों के विमर्श से ज्यादा तथ्यात्मक सुझाव निकलेंगे। उन्होंने कहा कि 2047 में विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को देखते हुए परिवर्तन हो रहे हैं। यह बदलाव केवल शिक्षा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों में हो रहे हैं। जहां- जहां भी गुलामी के चिन्ह हैं, उन्हें विदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत के तंत्र को समझने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय दर्शन को ठीक से समझना और इसी के अनुसार आगे बढ़ना होगा।


आनंदशाला के प्रारंभ में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु मिलिंद दांडेकर ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों में यूजीसी ने अपनी यात्रा की है। भारत सरकार ने यूजीसी, एआईसीटीई आदि संस्थाओं को एकीकृत करने का लक्ष्य इस विधेयक में रखा है। आनंदशाला में शिक्षाविदों के चिंतन मनन का सार जेपीसी को भेजा जाएगा।
बीज वक्ता एवं भारतीय शिक्षण मंडल के उच्च शिक्षा गतिविधि अखिल भारतीय सह प्रमुख विश्वजीत पेंडसे ने पीपीटी के माध्यम से विधेयक को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि विकसित समाज से ही विकसित भारत का निर्माण होगा। इसीलिए विकसित समाज हमारा लक्ष्य है। देश के लिए पीढ़ी का निर्माण करना होगा जिससे वे देश को विकसित बना सकें। इस दृष्टि से हम इस विधेयक पर विचार विमर्श कर अपने सुझाव देंगे।
विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के मध्य क्षेत्र संयोजक लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने कहा कि समाज की विकृतियों को दूर करना है तो भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे लाना होगा। इस बिल के माध्यम से स्वायत्तता बढ़ेगी। भारतीय शिक्षण मंडल एक विचार प्रवाह है। हम शिक्षा में जो भी परिवर्तन चाहते हैं, इसके सुझाव सरकार को देने वाले हैं।
कार्यक्रम के अंत में मध्य भारत प्रान्त, भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांत अध्यक्ष प्रो हरिहर बसंत गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अनिल पाठक ओ एस डी, उच्च शिक्षा एवं सुशील मंडेरिया भी उपस्थित रहे l
कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, प्राध्यापक एवं भारतीय शिक्षण के मध्य भारत प्रांत एवं महानगर इकाई के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
कुलगुरुओं और शिक्षाविदों ने जेपीसी को दिए सुझाव
द्वितीय सत्र दो अलग अलग भागों में हुआ। एक भाग में प्रांत के कुलगुरुओं ने एवं दूसरे भाग में शिक्षाविदों ने विचार विमर्श कर सुझाव दिए। ये सुझाव इस विधेयक हेतु गठित संयुक्त संसदीय समिति को भेजे जाएंगे।
समापन सत्र में हुई खुली चर्चा
आनंदशाला के अंतिम सत्र में प्रतिभागी शिक्षाविदों के बीच खुली चर्चा हुई। मंच पर मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु मिलिंद दांडेकर, भारतीय शिक्षण मंडल के उच्च शिक्षा गतिविधि सह प्रमुख विश्वजीत पेंडसे, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के निदेशक प्रज्ञेष अग्रवाल एवं एमिटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु आर एस तोमर उपस्थित थे। विषय प्रबोधन प्रज्ञेष अग्रवाल ने किया। खुली चर्चा में शिक्षाविदों ने अपनी जिज्ञासा एवं सुझाव रखे।

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