सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मोबियस फाउंडेशन ने ‘बायोस्फीयर रिजर्व: सतत विकास और संरक्षण के लिए रणनीतियाँ’ विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन संविधान क्लब ऑफ इंडिया में किया। इस आयोजन में यूनेस्को, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और पर्यावरणविद शामिल हुए, जिन्होंने भारत के पारिस्थितिक भविष्य में बायोस्फीयर रिजर्व की भूमिका पर चर्चा की। बातचीत में जैव विविधता की सुरक्षा, सतत आजीविका को बढ़ावा देने और 2030 सतत विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने में मोबियस फाउंडेशन की दृष्टि पर जोर दिया गया।

मोबियस फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री प्रदीप बर्मन ने अपने संबोधन में कहा:

“बायोस्फीयर रिजर्व एक स्थायी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इन घटते मूल्यवान पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित करने के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके पारिस्थितिक और आर्थिक योगदान से लाभान्वित हो सकें।”

प्रमुख वक्ता एवं पैनलिस्ट:

इस पैनल में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें प्रमुख थे:

✔ डॉ. बेन्नो बोअर – प्रमुख, प्राकृतिक विज्ञान, यूनेस्को (दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय)

✔ डॉ. प्रिया गुप्ता – प्रमुख, शासन, कानून एवं नीति, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया

✔ डॉ. इराच भरूचा – निदेशक, भारती विद्यापीठ पर्यावरण शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान

✔ डॉ. आदित्य जोशी – पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मणिपुर एवं मोबियस फाउंडेशन के सलाहकार

✔ श्री प्रवीण गर्ग – अध्यक्ष, मोबियस फाउंडेशन

इस चर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री अभिलाष खंडेकर ने किया।

मुख्य चर्चाएँ और निष्कर्ष:

🔹 पैनल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी की कमी और आजीविका के वैकल्पिक साधनों का अभाव अक्सर संरक्षण और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच संघर्ष को जन्म देता है।

🔹 अनियंत्रित विकास, आक्रामक प्रजातियों और बड़े पैमाने की परियोजनाएँ इन रिजर्व के पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा हैं।

🔹 धन की कमी और लाभों के असमान वितरण के कारण संरक्षण प्रबंधन और सतत विकास योजनाएँ बाधित होती हैं।

🔹 शोध और निगरानी ढांचे की अपर्याप्तता प्रभावी संरक्षण योजना में बड़ी बाधा है।

संभावनाएँ और समाधान:

🔸 जैव विविधता संरक्षण और आवास पुनर्स्थापन की पहल को सशक्त करना।

🔸 नीतिगत रूपरेखाओं और शासन को मजबूत करना ताकि सतत विकास सुनिश्चित हो।

🔸 स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना और उनके पारंपरिक ज्ञान को संरक्षण रणनीतियों में शामिल करना।

यूनेस्को के डॉ. बेन्नो बोअर ने कहा:

“बायोस्फीयर रिजर्व जीवंत प्रयोगशालाएँ हैं, जहाँ हम सर्वोत्तम तरीकों को लागू, परख और प्रदर्शित कर सकते हैं, ताकि मनुष्य और प्रकृति में सामंजस्य बना रहे। इनके सफल प्रबंधन के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।”

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